mp-flowers-global-reach : मध्यप्रदेश ने कृषि के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। अब यह राज्य देश में फूलों के उत्पादन के मामले में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। बीते वर्ष प्रदेश में 5 लाख 12 हजार 914 टन फूलों का उत्पादन हुआ, जो न केवल किसानों के लिए आय का नया साधन बना है, बल्कि विदेशों तक इसकी महक पहुंचने लगी है। फूलों की खेती अब प्रदेश में एक उभरती हुई कैश क्रॉप के रूप में सामने आ रही है।
फूलों की खेती बनी किसानों के लिए वरदान
छोटी जोत वाले किसान, जिनके पास एक या दो एकड़ जमीन है, वे फूलों की खेती कर अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर भोपाल की बरखेड़ा बोदर गांव की लक्ष्मीबाई कुशवाह अब गुलाब, जरबेरा और गेंदा उगाकर हर महीने 3-4 लाख रुपये तक कमा रही हैं। परंपरागत फसलों की जगह फूलों की ओर बढ़ता रुझान किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंची मध्यप्रदेश की महक
प्रदेश के गुना जिले में उगाए गए गुलाब की मांग दिल्ली, मुंबई, जयपुर जैसे महानगरों के साथ अब पेरिस और लंदन तक पहुंच गई है। यह सिर्फ उत्पादन का नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण ब्रांड बनने का प्रमाण है। फूलों की वैश्विक मांग को देखते हुए सरकार भी इसके उत्पादन को बढ़ावा दे रही है।
हाईटेक नर्सरियों और तकनीकी सहयोग से बढ़ा उत्पादन
2024-25 में फूलों की खेती में 5,329 हेक्टेयर का विस्तार हुआ है। सरकार ग्वालियर में 13 करोड़ रुपये की लागत से हाईटेक नर्सरी बना रही है, जो किसानों को बेहतर बीज और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराएगी। इससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
गेंदा, गुलाब और सेवंती की सबसे ज्यादा खेती
फूलों की खेती में सबसे ज्यादा क्षेत्र गेंदा (24,214 हेक्टेयर) का है, इसके बाद गुलाब (4,502 हेक्टेयर) और सेवंती (1,709 हेक्टेयर) का नंबर आता है। फूलों की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता औसतन 15.01 टन है, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर है। इसके अलावा ग्लेड्युलस, रजनीगंधा, और औषधीय पुष्पों में भी उत्पादन हो रहा है।
फूलों से खिला कारोबार
प्रदेश में कुल 42,978 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती हो रही है, और उद्यानिकी फसलों का कुल रकबा 27.71 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। बीते चार वर्षों में फूलों के उत्पादन में 86,294 टन की वृद्धि हुई है, जिससे यह क्षेत्र किसानों के लिए नए अवसर लेकर आया है।