मध्यप्रदेश में साइबर ठगी अब एक गंभीर और तेजी से बढ़ती समस्या बन गई है। विधानसभा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा साझा किए गए आंकड़ों ने प्रदेश की साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले पांच वर्षों में राज्य में 1054 करोड़ रुपए की ऑनलाइन ठगी हो चुकी है, जिसमें से महज 2 करोड़ रुपए ही पीड़ितों को वापस मिल पाए हैं। पुलिस ने केवल 10% राशि होल्ड की है। हजारों मामले अब भी लंबित हैं।
साइबर ठगी के आंकड़े चौंकाने वाले
साल 2021 से 13 जुलाई 2025 तक प्रदेश में साइबर अपराधियों ने बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी वेबसाइट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और ई-कॉमर्स जैसे तरीकों से नागरिकों को निशाना बनाया। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बताया कि इन माध्यमों से कुल 1054 करोड़ रुपये की ठगी हुई है।
होल्ड की गई राशि: ₹105.21 करोड़
वापसी हुई राशि: सिर्फ ₹1.94 करोड़
रिकवरी दर: लगभग 2%
युवाओं और बुजुर्गों पर ज्यादा हमला
सीएम के मुताबिक, साइबर अपराधियों ने सबसे ज्यादा युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को अपना शिकार बनाया। जनवरी 2025 से जुलाई 2025 तक 2.48 लाख शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 579 केस साइबर ठगी से संबंधित थे।
2022 से जुलाई 2025 तक दर्ज मामले: 3541
निपटाए गए केस: 717
अब भी लंबित: 1575 से अधिक मामले
पुलिस और सरकार की चुनौतियाँ
भाजपा विधायक सिद्धार्थ तिवारी ने कहा कि सरकार साइबर अपराध रोकने के लिए नई तकनीकें अपना रही है और जागरूकता फैला रही है। लेकिन रिकवरी की दर बेहद कम है, जिससे जनता का भरोसा डगमगाता नजर आ रहा है।
साइबर सुरक्षा के लिए ज़रूरी है जागरूकता
"एक क्लिक में अकाउंट खाली" – साइबर ठगी का सबसे बड़ा हथियार है लालच और जल्दबाजी। जागरूकता ही इससे बचाव का पहला कदम है। सरकार को न केवल टेक्नोलॉजी में निवेश करना होगा बल्कि साइबर लीगल सिस्टम को तेज और प्रभावी बनाना होगा।