तकनीकी गड़बड़ी को लेकर बड़ा एक्शन..राजधानी भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र में रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) को 90 डिग्री पर मोड़ने के मामले में सरकार ने बड़ी कार्रवाई की
है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के दो चीफ इंजीनियर समेत कुल 7 इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक रिटायर्ड अधिकारी को भी जांच के दायरे में लिया
गया
है। इस ब्रिज को लेकर तकनीकी
खामी और रेलवे की बिना अनुमति
के डिजाइन को मंजूरी देने के
आरोप में यह कार्रवाई की गई
है।
दो फर्मों
को किया गया ब्लैकलिस्ट
आरओबी
की डिजाइन और निर्माण कार्य
में शामिल दो निजी फर्मों को
भी सरकार ने ब्लैकलिस्ट कर
दिया है। इन फर्मों ने ही पुल
की डीपीआर तैयार की थी, जिसे
बाद में इंजीनियरों ने बिना
रेलवे बोर्ड की सहमति के मंजूरी
देकर निर्माण कार्य शुरू कर
दिया था।
मुख्यमंत्री
ने दिए थे जांच के आदेश
मुख्यमंत्री
द्वारा गठित जांच कमेटी ने
तकनीकी खामियों की पुष्टि
की, जिसके आधार पर
यह अनुशासनात्मक कदम उठाया
गया। मुख्यमंत्री ने सोशल
मीडिया पर भी इस कार्रवाई की
जानकारी साझा करते हुए बताया
कि आरओबी में सुधार के लिए एक
विशेष समिति बनाई गई है। पुल
का लोकार्पण तभी होगा जब सुरक्षा
और तकनीकी सुधार पूरे हो
जाएंगे।
निर्माण
की समयरेखा और गड़बड़ियों का
ब्यौरा
2017 में पुल
निर्माण को मंजूरी दी गई।
2018
में डिजाइन को प्रशासनिक
स्वीकृति मिली, लेकिन
शासन सहमत नहीं था।
2021 में
भूमिपूजन हुआ, इंजीनियरों
ने शासन को समझाकर आगे बढ़ाया।
मार्च
2023 में 18 करोड़
की लागत से निर्माण शुरू
हुआ।
जिन
इंजीनियरों पर गिरी गाज
चार
इंजीनियरों पर बिना रेलवे
सहमति के डिजाइन को स्वीकृति
देने का आरोप है:
एमपी
सिंह (रिटायर्ड),
शानुल
सक्सेना,
संजय
खांडे,
शबाना
रज्जाक।
चार
अन्य इंजीनियर इसलिए निलंबित
हुए क्योंकि रेलवे द्वारा
गड़बड़ी बताने के बाद भी सुधार
नहीं किया गया:
जावेद
शकील,
उमाशंकर
मिश्रा,
रवि
शुक्ला,
जीपी
वर्मा।
अगला कदम
क्या होगा?
निलंबित
इंजीनियरों को आरोप पत्र जारी
किया गया है। उन वरिष्ठ अफसरों
पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही
है, जिनके निर्देशन
में यह निर्माण हुआ। दोषियों
से आर्थिक क्षति की वसूली की
जाएगी।