मध्यप्रदेश में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। राज्यपाल के आधिकारिक आवास ‘राज भवन’ का नाम अब बदलकर ‘लोक भवन’ कर दिया गया है। केंद्र सरकार के निर्णय के बाद यह बदलाव लागू हो गया है और अब सभी राज्यों में राजभवन को लोक भवन कहा जाएगा। यह कदम गुलामी की मानसिकता वाले प्रतीकों को हटाने और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्राथमिकता देने की दिशा में उठाया गया है। इससे पहले एमपी में कुलपति का पदनाम भी बदला गया था।
केंद्र के निर्देश के बाद लागू हुआ बदलाव
मध्यप्रदेश में आज राज भवन के नए नाम की औपचारिक घोषणा कर दी गई। अब राज्यपाल का मुख्यालय ‘लोक भवन’ के नाम से जाना जाएगा। यह बदलाव केंद्र सरकार की उस पहल का हिस्सा है, जिसके तहत पिछले वर्ष राज्यपालों के सम्मेलन में राजभवन शब्द हटाने का सुझाव दिया गया था। सुझाव में कहा गया था कि ‘राज’ शब्द उपनिवेशकालीन सोच का प्रतीक है और इसे लोकतांत्रिक भावनाओं के अनुरूप परिवर्तित किया जाना चाहिए।
गुलामी के प्रतीकों को हटाने की प्रक्रिया का विस्तार
देश में हाल के वर्षों में कई स्थानों और पदनामों में बदलाव किया गया है, ताकि प्रशासनिक संस्थानों को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ा जा सके। इसी क्रम में मध्यप्रदेश में इससे पहले विश्वविद्यालयों के कुलपति (Vice-Chancellor) के पदनाम को बदलकर ‘कुलगुरु’ किया जा चुका है। अब एमपी के सभी विश्वविद्यालय प्रमुख इसी नाम से पहचाने जाते हैं। लोक भवन नामकरण को भी इसी वैचारिक श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है।
राज्य के अधिकारियों में नई पहचान की तैयारी
नई अधिसूचना के लागू होते ही सभी आधिकारिक दस्तावेज, पट्टिकाएं और सरकारी संचार अब ‘लोक भवन’ नाम से जारी किए जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि यह परिवर्तन राज्य की पहचान और प्रशासनिक भाषा में एक सकारात्मक बदलाव लाएगा। बदलते समय के साथ यह कदम शासन की नई कार्यशैली और जनता-केन्द्रित विचार को भी दर्शाता है।