भोपाल। मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य और आयुर्वेद क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अगले 18 महीनों में प्रदेश को 8 नए आयुर्वेद कॉलेज मिलने वाले हैं। यह पहल न केवल पारंपरिक चिकित्सा शिक्षा को प्रोत्साहन देगी, बल्कि मेडिकल टूरिज्म को भी बढ़ावा देगी। इन कॉलेजों के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत 180 करोड़ रुपये का अनुदान स्वीकृत किया है। इस परियोजना के पूरा होने पर मध्यप्रदेश आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।
कहां-कहां बनेंगे कॉलेज
प्रदेश में नए आयुर्वेद कॉलेजों की स्थापना सागर, शहडोल, नर्मदापुरम, बालाघाट, मुरैना, झाबुआ और शुजालपुर में की जाएगी। इसके अलावा, डिंडौरी में जिला खनिज प्रतिष्ठान मद से एक कॉलेज का निर्माण होगा। इन सभी कॉलेजों के निर्माण पर लगभग 70 करोड़ रुपये प्रति संस्थान की लागत आएगी, जहां आधुनिक सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
1570 नए पदों पर भर्ती
इन कॉलेजों की स्थापना से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। कुल 1570 नए पदों पर भर्ती की जाएगी, जिससे आयुर्वेद चिकित्सा क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे।
मेडिकल टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
प्रदेश सरकार का मानना है कि यह पहल न केवल स्थानीय स्तर पर आयुर्वेद को प्रोत्साहन देगी, बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करेगी। मेडिकल टूरिज्म के जरिए प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और आयुर्वेदिक चिकित्सा का वैश्विक प्रचार-प्रसार होगा।
आयुर्वेद में अग्रणी बनेगा मध्यप्रदेश
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद मध्यप्रदेश देश में आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी बन सकेगा। यह पहल प्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं और आयुर्वेद शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।