मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर स्पष्ट संकेत दिए हैं कि राज्य सरकार आगामी वर्षाकालीन विधानसभा सत्र में इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। उन्होंने कहा कि कानून का मसौदा व्यापक जनसुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस की राजनीति, मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और भोजशाला विवाद पर भी सरकार का पक्ष सामने रखा।
समान नागरिक संहिता पर सरकार की तैयारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया को लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ा रही है। उनके अनुसार सरकार चाहती तो सीधे विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत कर सकती थी, लेकिन इससे पहले व्यापक जनभागीदारी को प्राथमिकता दी गई। इसी उद्देश्य से सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई, जिसने प्रदेश के 55 जिलों और 10 संभागों का दौरा कर लोगों से सुझाव प्राप्त किए। मुख्यमंत्री ने बताया कि 10 लाख से अधिक सुझावों के आधार पर कानून का प्रारूप तैयार किया गया है।
सभी नागरिकों के लिए समान कानून की बात
यूसीसी पर अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में सभी नागरिकों के लिए समान कानून होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने एक पत्नी का आदर्श प्रस्तुत किया था और समाज में समानता का भाव कानूनों में भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है तथा उनके जीवन में आने वाली कानूनी और सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए समान नागरिक संहिता आवश्यक मानी जा रही है।
कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी विभिन्न संवेदनशील मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाने से बचती है। उनके अनुसार कांग्रेस की राजनीति वोट बैंक के इर्द-गिर्द केंद्रित रहती है और कई विषयों को धार्मिक नजरिए से देखने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी वर्ग विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
भोजशाला विवाद पर सरकार का पक्ष
धार स्थित भोजशाला से जुड़े मामले पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विषय न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत जो भी निर्णय देगी, राज्य सरकार उसे पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ लागू करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करती है और कानून के दायरे में रहकर आगे की कार्रवाई करेगी।
मानसून सत्र पर टिकी निगाहें
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में दोहराया कि प्रदेश सरकार वर्षाकालीन विधानसभा सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता विधेयक को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। यदि विधेयक सदन में प्रस्तुत होता है, तो यह राज्य की विधायी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। अब सभी की निगाहें आगामी विधानसभा सत्र पर रहेंगी, जहां इस विषय पर आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हो सकती है।