मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे प्रवर समिति को भेजने और संशोधन स्वीकार करने की मांग की, लेकिन सरकार अपने रुख पर कायम रही। तीखी बहस, नारेबाजी और दो बार कार्यवाही स्थगित होने के बाद आखिरकार विधानसभा ने यूसीसी विधेयक को पारित कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे सामाजिक समानता और महिला सशक्तीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
हंगामे और नारेबाजी के बीच पास हुआ यूसीसी विधेयक
मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही यूसीसी विधेयक चर्चा का केंद्र बन गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मांग की कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक को पहले प्रवर समिति के पास भेजा जाए, ताकि उसके सभी प्रावधानों पर विस्तार से विचार किया जा सके। सरकार ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद विपक्षी विधायक वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। लगातार हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी, लेकिन कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर सरकार ने विधेयक पारित करा लिया।
आरिफ मसूद के संशोधन को नहीं मिली मंजूरी
यूसीसी विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने संशोधन प्रस्ताव रखा। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 29 के तहत संरक्षित धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों का हवाला देते हुए कुछ समुदायों को विधेयक के दायरे से बाहर रखने की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने उन्हें अपनी सीट से संशोधन पर बोलने का अवसर दिया, लेकिन सदन ने प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और संशोधन खारिज कर दिया।
मुख्यमंत्री बोले- 93 प्रतिशत लोगों ने यूसीसी का समर्थन किया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चर्चा के दौरान दावा किया कि प्रदेश के 93 प्रतिशत नागरिकों ने यूसीसी के पक्ष में अपनी राय दी है। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज में समानता, न्याय और महिला अधिकारों को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि धार्मिक परंपराओं और सामाजिक रीति-रिवाजों पर कोई रोक नहीं होगी, लेकिन सभी विवाहों का शासकीय पंजीयन अनिवार्य रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि एक पति या पत्नी के रहते दूसरा विवाह कानून के तहत मान्य नहीं होगा और उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
विपक्ष ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने इतने महत्वपूर्ण विधेयक को जल्दबाजी में पारित कराया। विपक्ष का कहना था कि व्यापक चर्चा और विशेषज्ञों की राय के लिए विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजा जाना चाहिए था। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जनता से व्यापक सुझाव लेने के बाद ही विधेयक तैयार किया गया है और इसे लागू करना समय की आवश्यकता है।
मानसून सत्र का सबसे चर्चित दिन
यूसीसी विधेयक पर हुई बहस ने विधानसभा के दूसरे दिन की कार्यवाही को सबसे ज्यादा चर्चित बना दिया। सत्ता पक्ष ने इसे प्रदेश में समान नागरिक व्यवस्था की दिशा में ऐतिहासिक फैसला बताया, जबकि विपक्ष ने प्रक्रिया और कुछ प्रावधानों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। हंगामे के बावजूद विधेयक के पारित होने के साथ मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बन गया।