मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज करेंगी। यह समिति 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इस पहल को राज्य में समान कानून व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कमेटी गठन से बढ़ी प्रक्रिया की रफ्तार
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में सरकार ने औपचारिक कदम उठाते हुए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह निर्णय राज्य में कानूनों को एकरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा जारी आदेश के बाद अब UCC का ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
रिटायर्ड जज को सौंपी गई जिम्मेदारी
इस समिति की कमान सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश को दी गई है, जिनके पास पहले भी इस तरह के कार्य का अनुभव है। उनकी अगुवाई में समिति राज्य के विभिन्न सामाजिक और कानूनी पहलुओं का अध्ययन करेगी, ताकि एक संतुलित और व्यावहारिक ड्राफ्ट तैयार किया जा सके।
60 दिन में सरकार को सौंपनी होगी रिपोर्ट
सरकार ने समिति को 60 दिनों का समय दिया है, जिसके भीतर उसे अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस रिपोर्ट में सुझाव, संभावित चुनौतियां और लागू करने के तरीके शामिल होंगे। इसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।
इन अहम मुद्दों पर रहेगा फोकस
समिति विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे निजी कानूनों का गहराई से अध्ययन करेगी। साथ ही महिला और बाल अधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील विषयों को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य एक ऐसा कानून बनाना है जो सभी नागरिकों के लिए समान और न्यायसंगत हो।
जनता और विशेषज्ञों से भी मांगे जाएंगे सुझाव
इस प्रक्रिया को व्यापक बनाने के लिए समिति आम जनता, धार्मिक संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों से भी सुझाव और आपत्तियां लेगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रस्तावित कानून समाज के सभी वर्गों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाए और उसमें संतुलन बना रहे।