Covid Insurance Claim Verdict : कोविड-19 महामारी के दौरान पति को खोने वाली एक महिला को मद्रास हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने बीमा क्लेम से जुड़े मामले में एकल न्यायाधीश के पुराने फैसले को पलट दिया है। अब बीमा कंपनी को महिला सैयद अली फातिमा को 26.87 लाख रुपये की बीमा राशि देनी होगी। हालांकि, इस रकम पर ब्याज देने से कंपनी को छूट दी गई है। मामला साल 2020 का है, जब महिला के पति की कोरोना संक्रमण के कारण मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद महिला ने बीमा पॉलिसी के तहत रकम मांगी थी, लेकिन कंपनी ने उनका दावा खारिज कर दिया। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा।
कोरोना से हुई थी पति की मौत
मामले के अनुसार, सैयद अली फातिमा के पति ने एक मास्टर पॉलिसी के तहत 26.87 लाख रुपये का बीमा लिया था। तीन जुलाई 2020 को वह कोविड-19 से संक्रमित हो गए। इसके बाद उन्हें पुडुचेरी के जिपमर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 26 जुलाई 2020 को उनकी मौत हो गई। पति की मृत्यु के बाद फातिमा ने बीमा कंपनी के सामने पॉलिसी के तहत मिलने वाली पूरी राशि का दावा किया। लेकिन कंपनी ने उनका क्लेम स्वीकार नहीं किया। इसके बाद महिला ने अपने हक की रकम पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
बीमा कंपनी ने क्यों खारिज किया क्लेम?
बीमा कंपनी ने दावा खारिज करने के पीछे पॉलिसी से जुड़ी जानकारी का हवाला दिया था। कंपनी का कहना था कि मृतक ने बीमा लेते समय अपनी डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की जानकारी नहीं दी थी। कंपनी ने इसे जरूरी जानकारी छिपाने का मामला माना। बीमा पॉलिसी में आवेदक से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सही तरीके से देने की अपेक्षा की जाती है। इसी आधार पर कंपनी ने 26.87 लाख रुपये का भुगतान करने से इनकार कर दिया। इसके बाद फातिमा ने बीमा कंपनी के फैसले को अदालत में चुनौती दी।
सिंगल जज ने याचिका कर दी थी खारिज
बीमा कंपनी से राहत नहीं मिलने पर फातिमा ने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई करने वाले एकल न्यायाधीश ने माना कि मृतक ने अपनी बीमारी से जुड़ी जानकारी नहीं दी थी। अदालत ने इसे बीमा पॉलिसी में जरूरी ईमानदारी की शर्त का उल्लंघन माना और महिला की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद फातिमा ने इस फैसले को चुनौती देते हुए दो न्यायाधीशों की पीठ के सामने अपील दायर की। अब इसी अपील पर सुनवाई के बाद महिला को राहत मिली है।
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दो जजों की पीठ ने क्या कहा?
मद्रास हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सीवी कार्तिकेयन और न्यायमूर्ति आर शक्तिवेल की पीठ ने मामले पर सुनवाई की। पीठ ने कहा कि कोविड-19 एक ऐसा संक्रमण था, जो किसी को भी प्रभावित कर सकता था। अदालत ने उस समय की परिस्थितियों पर भी ध्यान दिया, जब चिकित्सा जगत को वायरस के असर और उसके इलाज के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी। पीठ के अनुसार, भले ही बीमा पॉलिसी में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का जिक्र नहीं किया गया था, फिर भी कोविड से हुई मौत के जोखिम को बीमा कवरेज से बाहर नहीं माना जाना चाहिए। इसी आधार पर एकल न्यायाधीश का फैसला पलट दिया गया।
₹26.87 लाख मिलेंगे, लेकिन ब्याज नहीं
हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी को सैयद अली फातिमा को 26.87 लाख रुपये की बीमा राशि देने का आदेश दिया है। हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि मृतक ने अपनी बीमारियों की जानकारी नहीं दी थी। इसी वजह से बीमा कंपनी को रकम पर ब्याज देने से छूट दी गई है। इस फैसले से महिला को लंबे समय से चल रहे बीमा विवाद में राहत मिली है। मामला यह भी दिखाता है कि बीमा क्लेम के विवाद में पॉलिसी की शर्तों के साथ-साथ मौत की परिस्थितियों और संबंधित जोखिमों पर भी विचार किया जा सकता है।