UP News: उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित सालाना परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं। इस वर्ष करीब 80 हजार छात्र-छात्राओं ने परीक्षा के लिए आवेदन किया था। प्रदेश भर में जहां पहले 30 से 35 मूल्यांकन केंद्र बनाए जाते थे, पिछले साल 11 मूल्यांकन केंद्र बनाए गए थे। वहीं इस बार परिषद ने केवल 6 मूल्यांकन केंद्र बनाए हैं। परिषद द्वारा इन मूल्यांकन केंद्रों पर सात लाख से अधिक कापियों के डंप करने से अफरातफरी मची हुई है।
16 जिलों की कॉपियां भेजी गई
जानकारी के मुताबिक, एक-एक मूल्यांकन केंद्र पर लगभग 16 जिलों की कॉपियां भेजी गई हैं। इस तरह छह केंद्रों पर करीब 7 लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाएं जांच के लिए पहुंच चुकी हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सीमित केंद्रों पर इतने बड़े स्तर पर मूल्यांकन कार्य के लिए पर्याप्त स्टॉफ की व्यवस्था कैसे की जाएगी।
शिक्षक संगठन ने उठाए सवाल
टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया उत्तर प्रदेश के जनरल सेक्रेटरी मौलाना दीवान साहब ने बातचीत में कई गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान मदरसा बोर्ड ने कड़े इंतजाम किए थे। सीसीटीवी कैमरे, उड़न दस्ता, सचल दस्ता और सेंट्रल मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई थीं। लेकिन परीक्षा के बाद मूल्यांकन केंद्रों की संख्या कम कर देने से कॉपियों की सही जांच पर सवालिया निशान लग गया है। मौलाना दीवान ने बताया कि पिछले वर्षों में जब परीक्षार्थियों की संख्या कम थी, तब भी 30 से 35 मूल्यांकन केंद्र बनाए गए थे, ताकि कॉपियों की जांच सुचारु और पारदर्शी ढंग से हो सके। इस बार एक केंद्र पर 16 जिलों की कॉपियां भेजी गई हैं। ऐसे में स्टॉफ की कमी के बीच समयबद्ध और निष्पक्ष मूल्यांकन कैसे संभव होगा, यह बड़ा प्रश्न है। उन्होंने कहा कि मदरसा बोर्ड को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला है।
मूल्यांकन शुल्क को लेकर भी नाराज़गी
मौलाना दीवान ने मूल्यांकन शुल्क को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि एक कॉपी जांचने पर लगभग 8 रुपये का भुगतान निर्धारित है, लेकिन शिक्षकों तक यह राशि या तो पहुंचती नहीं है या केंद्र संचालक स्तर पर रोक ली जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई वर्षों से मूल्यांकन दर में बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। शिक्षक दूरदराज से मूल्यांकन केंद्रों पर पहुंच कर मेहनत करते हैं, लेकिन उन्हें उनकी मेहनत का उचित भुगतान नहीं मिल पाता।
रिज़ल्ट में देरी से छात्रों को नुकसान
उन्होंने यह भी कहा कि मदरसा शिक्षा परिषद हर वर्ष समय पर परीक्षा तो कराता है, लेकिन परिणाम अन्य बोर्डों के बाद घोषित करता है। जहां (यूपी बोर्ड), (सीबीएसई) और (आईसीएसई) के परिणाम पहले आ जाते हैं। वहीं मदरसा बोर्ड का रिजल्ट बाद में जारी होता है। इससे छात्रों को विश्वविद्यालयों में दाखिले के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि अधिकतर विश्वविद्यालयों में प्रवेश की अंतिम तिथि निकल चुकी होती है। उनका कहना है कि इस बार कम मूल्यांकन केंद्र बनाए जाने से कॉपियों की जांच में और देरी हो सकती है, जिसका सीधा असर परिणाम पर पड़ेगा और छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा।
यह मामला उनके संज्ञान में नहीं था
इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश राज्य मंत्री (अल्पसंख्यक कल्याण), दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार छात्रों के भविष्य के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होने देगी। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि यदि कहीं भी गड़बड़ी पाई जाती है, तो विभागीय स्तर पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा।