प्रयागराज। माघ मेला क्षेत्र इस बार केवल आस्था का केंद्र नहीं रहा, ये स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा ग्रोथ इंजन बनकर उभरा। 44 दिनों तक चले आयोजन में व्यापार का आंकड़ा 1100 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। कारोबारियों का अनुमान है कि कुल खर्च इससे भी अधिक हो सकता है। संगम की रेत पर डुबकी लगाने आए करोड़ों श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना के साथ खरीदारी में भी खुलकर हिस्सा लिया। इसका सीधा लाभ छोटे, मध्यम और बड़े सभी वर्ग के व्यापारियों को मिला।
4 बाजार जोन बने आर्थिक गतिविधि के केंद्र
मेला क्षेत्र में विकसित चार प्रमुख बाजार जोन इस बार व्यापार के हब साबित हुए। पूजा सामग्री, ऊनी वस्त्र, चाय-नाश्ता, खिलौने, प्रसाद, धार्मिक पुस्तकें, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की दुकानों पर दिनभर भीड़ रही। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल के अनुसार लगभग 22 करोड़ आगंतुकों में से प्रत्येक ने औसतन 90 से 100 रुपये भी खर्च किए हों, तो कुल कारोबार 1500 करोड़ रुपये के पार जा सकता है। हालांकि केवल मेला क्षेत्र के चार बाजार जोन में ही लगभग 1100 करोड़ रुपये का व्यापार आंका गया है।
छोटे दुकानदारों की भी हुई अच्छी कमाई
मेला क्षेत्र में रजिस्टर्ड और नॉन रजिस्टर्ड दोनों तरह के दुकानदारों को इस बार जबरदस्त फायदा हुआ। प्रयागराज के दारागंज के रहने वाले और किले के पास शिकंजी बेचने वाले रामदीन का कहना है कि इतनी भीड़ पहले कभी नहीं देखी। सुबह से देर रात तक ग्राहकों की लाइन लगी रहती थी। परेड मैदान के पास पॉपकॉर्न बेचने वाले रामू ने बताया कि इस बार बिक्री उम्मीद से कहीं अधिक रही। ठेला-खोमचा लगाने वाले, हस्तनिर्मित वस्त्र बेचने वाली महिलाएं और स्थानीय कारीगर भी इस आर्थिक लहर का हिस्सा बने।
बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से बढ़ा व्यापार
माघ मेला पहले ही अपने रिकॉर्ड बजट और बुनियादी ढांचे को लेकर चर्चा में था। चौड़ी सड़कों, बेहतर लाइटिंग, सुव्यवस्थित बाजार जोन और सुगम आवाजाही ने व्यापार को नई रफ्तार दी। मेला प्रशासन ने दुकानों का आवंटन इस तरह किया कि श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित न हो और बाजार की गतिविधियां भी सुचारु रहें।
व्यापारिक संगठनों के अनुसार यह मेला हाल के वर्षों में सबसे अधिक रोजगार सृजन करने वाले आयोजनों में शामिल रहा। अस्थायी दुकानों, परिवहन, सुरक्षा, सफाई और खानपान सेवाओं में हजारों लोगों को काम मिला। होटल इंडस्ट्री, होम स्टे वालों की भी बल्ले बल्ले रही। इन सबके बीच आस्था और अर्थव्यवस्था का यह संगम प्रयागराज के लिए एक बड़ा आर्थिक संकेत भी माना जा रहा है।