Ujjain Mahakal Bhasma Aarti Timing: सावन और भाद्रपद का महीना भगवान महाकाल के भक्तों के लिए बेहद खास होता है। इसी दौरान महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के समय में हर साल विशेष बदलाव किए जाते हैं। श्रावण मास की शुरुआत से अब तक आरती तय समय से डेढ़ घंटा पहले हो रही थी, लेकिन अब इसे पुनः पूर्व निर्धारित समय पर कर दिया गया है। मंगलवार से भक्तों को सुबह 4 बजे होने वाली भस्म आरती में सम्मिलित होने का अवसर मिलेगा।
सुबह 4 बजे होगी भस्म आरती
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि से नई व्यवस्था लागू हो गई है। अब प्रतिदिन की भस्म आरती सुबह 4 बजे ही शुरू होगी। मंगलवार को आयोजित आरती में मंदिर के पट भगवान मानभद्र और वीरभद्र की आज्ञा से खोले गए। इसके बाद बाबा महाकाल का विधिवत स्नान और पंचामृत अभिषेक किया गया। फिर केसर मिले जल से अर्पण कर भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। भांग और मावे से श्रृंगार करने के बाद अखाड़े के साधुओं ने बाबा को भस्म अर्पित की।
निराकार से साकार रूप में होते हैं प्रकट
मान्यता है कि भस्म आरती के दौरान ही भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों के सामने प्रकट होते हैं। इसी कारण यह आरती विशेष महत्व रखती है। श्रद्धालु इस दिव्य दर्शन के लिए देशभर से उज्जैन पहुंचते हैं। आरती के समय मंदिर में आध्यात्मिक वातावरण बन जाता है और भक्तों की भावनाओं का सागर उमड़ पड़ता है।
अजा एकादशी का महत्व
भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। पंडितों के अनुसार इस बार की एकादशी पर कई शुभ योग बने हैं, जिनमें भगवान की पूजा करने से दोगुना फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि आज बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाकाल के दर्शन किए और भस्म आरती का लाभ उठाया।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
मंदिर परिसर में आज सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन के साथ ही अजा एकादशी का व्रत रखकर आशीर्वाद प्राप्त किया।