भगवान महाकाल के दर्शन की इच्छा लेकर महाराष्ट्र से उज्जैन पहुंची एक बीमार महिला की अंतिम ख्वाहिश अधूरी रह गई। महाकाल मंदिर पहुंचने से पहले ही महिला ने दम तोड़ दिया, जिससे उसके बुजुर्ग पति पूरी तरह टूट गए। अनजान शहर में पत्नी के शव के साथ अकेले पड़े वृद्ध की मदद के लिए एक समाजसेवी आगे आए और पूरे सम्मान के साथ महिला का अंतिम संस्कार कराया। घटना ने लोगों को भावुक कर दिया।
महाकाल दर्शन की थी अंतिम इच्छा
महाराष्ट्र के नासिक निवासी भेरूलाल अपनी पत्नी सीमा को लेकर उज्जैन आए थे। सीमा लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं और चलने-फिरने में भी असमर्थ थीं। उन्होंने जीवन में आखिरी बार भगवान महाकाल के दर्शन करने की इच्छा जताई थी। इसी इच्छा को पूरा करने के लिए पति उन्हें लेकर बाबा महाकाल की नगरी पहुंचे थे।
मंदिर पहुंचने से पहले ही हो गया निधन
उज्जैन पहुंचने के बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई और महाकाल मंदिर के दर्शन से पहले ही उनकी मौत हो गई। पत्नी की अचानक मौत से बुजुर्ग पति सदमे में आ गए। अपरिचित शहर में उनके साथ कोई परिजन भी मौजूद नहीं था, जिससे स्थिति और अधिक कठिन हो गई।
असहाय पति की मदद को आगे आए समाजसेवी
स्थानीय लोगों ने बुजुर्ग की हालत देखकर उन्हें समाजसेवी अनिल डागर के बारे में जानकारी दी। जैसे-तैसे वह पत्नी के शव के साथ उनके पास पहुंचे और पूरी घटना बताई। स्थिति समझते ही समाजसेवी ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया और अंतिम संस्कार की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली।
पूरे सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
समाजसेवी अनिल डागर ने श्मशान घाट पर लकड़ी और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं कराईं। इसके बाद हिंदू रीति-रिवाजों और पूरे विधि-विधान से महिला का अंतिम संस्कार कराया गया। उन्होंने बुजुर्ग पति को हर अंतिम क्रिया में सहारा दिया और पूरी प्रक्रिया सम्मानपूर्वक संपन्न कराई।
लोगों ने की मानवीय पहल की सराहना
इस घटना के बाद समाजसेवी की संवेदनशीलता और मानवता की हर ओर चर्चा हो रही है। स्थानीय लोगों ने कहा कि मुश्किल समय में जिस तरह उन्होंने एक अनजान बुजुर्ग की मदद की, वह समाज के लिए मिसाल है। महाकाल नगरी में सामने आई यह घटना कई लोगों की आंखें नम कर गई।