Mahakal Raksha Bandhan ---रक्षाबंधन के पावन पर्व पर उज्जैन के बाबा महाकाल के दरबार में आस्था का अलग ही रंग देखने को मिला। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को सबसे पहले रक्षासूत्र अर्पित किया गया। पुजारी परिवार की महिलाओं ने करीब दो फीट की विशेष राखी भगवान को पहनाई। इसके साथ ही सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ और भक्तिमय माहौल नजर आया।
भस्म आरती में निभाई गई खास परंपरा
श्री महाकालेश्वर मंदिर में रक्षाबंधन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में विशेष पूजा और अभिषेक के साथ हुई। तड़के करीब 3 बजे बाबा महाकाल का पूजन किया गया। इसके बाद भस्म आरती संपन्न हुई। आरती के दौरान बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया और रक्षासूत्र अर्पित कर पर्व की शुरुआत की गई। इस दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालु भगवान की भक्ति में लीन नजर आए।
पुजारी परिवार की महिलाओं ने बांधी राखी
रक्षाबंधन के मौके पर पुजारी और पुरोहित परिवार की महिलाओं ने बाबा महाकाल के लिए विशेष राखियां तैयार की थीं। करीब दो फीट की आकर्षक राखी भगवान को अर्पित की गई। राखी में पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों को शामिल किया गया था। इस खास परंपरा के जरिए बाबा महाकाल को भाई के रूप में रक्षासूत्र समर्पित किया गया।
राखी में दिखा शिव और कृष्ण का संगम
इस बार बाबा महाकाल को अर्पित की गई राखी में शैव और वैष्णव परंपरा की झलक भी देखने को मिली। राखी में भगवान शिव से जुड़े त्रिशूल, डमरू और रुद्राक्ष के साथ भगवान श्रीकृष्ण के मोरपंख और गोमाता के प्रतीकों को जगह दी गई। इस अनोखे संयोजन ने मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा।
सवा लाख लड्डुओं का महाभोग
विशेष पूजा और भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। इसके बाद प्रसादी श्रद्धालुओं में वितरित की गई। मान्यता के अनुसार श्रावण मास में कई भक्त व्रत रखते हैं और रक्षाबंधन के दिन बाबा महाकाल को लगाए गए महाभोग की प्रसादी ग्रहण कर अपना उपवास पूरा करते हैं। रक्षाबंधन पर हुई इस विशेष पूजा ने महाकाल मंदिर में आस्था और उत्सव का माहौल बना दिया।