श्रावण मास में बाबा महाकाल की भव्य सवारी तैयार, हर सोमवार दिखेगी नई थीम की झलक। श्रावण-भादों मास में बाबा महाकाल की सवारी इस बार कई मायनों में विशेष होने जा रही है। 14 जुलाई से शुरू होने जा रही सवारी श्रृंखला हर सोमवार को अलग-अलग थीम के साथ निकलेगी, जिसमें एलईडी झांकियों से लेकर जनजातीय नृत्य तक की प्रस्तुतियां होंगी। धार्मिक वातावरण, सांस्कृतिक झलक और श्रद्धा का संगम इस बार श्रावण मास को और भव्य बनाएगा। राजसी शाही सवारी 18 अगस्त को निकाली जाएगी, जिसे लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को लेकर व्यापक बदलाव किए गए हैं।
हर सोमवार अलग थीम, झांकियों से सजी रहेगी सवारी
प्रशासन के अनुसार, हर सोमवार को निकली जाने वाली सवारी की थीम अलग होगी। एलईडी स्क्रीन पर धार्मिक स्थलों और मंदिरों के महत्व की झांकियां दिखाई जाएंगी। इसके साथ ही मध्य प्रदेश की जनजातीय संस्कृति, लोकनृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियां भी सवारी का हिस्सा होंगी।
बदलेगा मंदिर के पट खुलने का समय, दर्शन व्यवस्था में भी बदलाव
श्रावण मास में 11 जुलाई से 13 अगस्त तक हर दिन भगवान महाकालेश्वर के मंदिर के पट रात 3 बजे खुलेंगे। विशेष रूप से प्रत्येक सोमवार को भस्म आरती का समय रात 2:30 बजे निर्धारित किया गया है। भस्म आरती के दर्शन श्रद्धालु कार्तिकेय मंडपम की अंतिम तीन पंक्तियों से कर सकेंगे।
दर्शन मार्ग और जल अर्पण के लिए तय हुआ नया रास्ता
श्रावण-भादों मास में सामान्य दर्शन के लिए त्रिवेणी संग्रहालय, नंदी द्वार, महाकाल लोक और कार्तिक मंडपम के रास्ते से दर्शन की व्यवस्था रहेगी। वहीं, कांवड़ यात्रियों को मंगलवार से शुक्रवार तक द्वार क्रमांक 4 से प्रवेश की अनुमति दी गई है। जल अर्पण की व्यवस्था सभामंडप और कार्तिकेय मंडपम से होगी, ताकि दर्शन और पूजा के दौरान भीड़ नियंत्रित रहे।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जूता स्टैंड और चिकित्सा व्यवस्था
श्रद्धालुओं के लिए तीन स्थानों—बड़ा गणेश मंदिर, मानसरोवर भवन और प्रशासनिक कार्यालय के पास—जूता स्टैंड की व्यवस्था की गई है। इन स्टैंड्स के पास जिला चिकित्सालय की टीमें भी तैनात रहेंगी ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
शीघ्र दर्शन के लिए विशेष गेट, ₹250 में मिलेगा तेज प्रवेश
श्रद्धालुओं को शीघ्र दर्शन की सुविधा भी दी गई है। इसके लिए द्वार क्रमांक 1 और 4 निर्धारित किए गए हैं, जहां से 250 रुपये में त्वरित दर्शन की सुविधा मिलेगी। दर्शन के बाद श्रद्धालु सीधे निर्गम द्वार से बाहर निकल सकेंगे।
सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन सतर्क, विभागों को सौंपी गई जिम्मेदारियां
सवारी मार्ग पर बिजली के पोल फाइबर शीट से ढंके जाएंगे, छज्जों पर भीड़ नहीं होगी, और सभी कैमरे दुरुस्त रहेंगे। आयोजन को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए हर विभाग को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई है—जैसे सुरक्षा, सफाई, जल प्रबंधन, चिकित्सा, सीसीटीवी, बैरिकेडिंग, पालकी, रथ, हाथी, नदी किनारे संकेत बोर्ड आदि। बाबा महाकाल की सवारी इस बार सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और व्यवस्था का अद्भुत संगम बनकर सामने आएगी। श्रद्धालुओं के लिए यह अनुभव अविस्मरणीय बनने जा रहा है।