उज्जैन स्थित भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर में एक बार फिर अनोखी भेंट अर्पित की गई। जबलपुर के श्रद्धालु संकल्प सिंह परिहार अपनी पत्नी रानी सिंह परिहार के साथ बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे और दुनिया की दुर्लभ एवं प्रीमियम किस्मों के आठ प्रकार के आम भोग स्वरूप अर्पित किए। इनमें जापान का मियाज़ाकी आम भी शामिल रहा, जिसे दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है।
12 वर्षों से पहली उपज महाकाल को कर रहे समर्पित
जबलपुर निवासी संकल्प सिंह परिहार और उनकी पत्नी रानी सिंह परिहार वर्ष 2014 से लगातार अपने बगीचे की पहली उपज भगवान महाकाल को अर्पित कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके 12 एकड़ में फैले महाकाल हाइब्रिड फार्म की सफलता बाबा महाकाल के आशीर्वाद से मिली है। इसी आस्था के चलते हर साल सबसे पहले फार्म के श्रेष्ठ और दुर्लभ आम मंदिर में भेंट किए जाते हैं।
मियाज़ाकी समेत 8 प्रीमियम किस्मों के आम चढ़ाए
इस बार करीब पांच किलोग्राम वजन के आठ अलग-अलग प्रीमियम किस्मों के आम भगवान महाकाल को अर्पित किए गए। इनमें जापान का प्रसिद्ध मियाज़ाकी आम सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र रहा। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया की R2E2, अमेरिका, मलेशिया और भारत की प्रीमियम वैरायटी मल्लिका सहित अन्य दुर्लभ किस्मों के आम भी भोग में शामिल रहे।
दुनिया के सबसे महंगे आमों में शामिल है मियाज़ाकी
मियाज़ाकी आम जापान के मियाज़ाकी प्रांत की विशेष किस्म है, जिसे उसके गहरे लाल रंग, मिठास और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 2.70 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बताई जाती है। यह आम प्राकृतिक शर्करा, एंटीऑक्सीडेंट, बीटा-कैरोटीन और फोलिक एसिड से भरपूर होता है, जिससे इसकी वैश्विक मांग लगातार बनी रहती है।
श्रद्धा को सबसे बड़ी संपत्ति मानता है परिवार
रानी सिंह परिहार ने बताया कि उनके लिए यह केवल फल चढ़ाने की परंपरा नहीं, बल्कि बाबा महाकाल के प्रति अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। उनका मानना है कि उनके फार्म के वास्तविक स्वामी भगवान महाकाल हैं और हर वर्ष पहली उपज उन्हें अर्पित करना परिवार की वर्षों पुरानी आस्था का हिस्सा बन चुका है।