श्रद्धालुओं के दान में पारदर्शिता लाने की दिशा में बड़ा कदम, मंदिर प्रबंधन ने दी टंच मशीन लगाने की स्वीकृति, अब होगी धातु की शुद्धता की वैज्ञानिक जांच देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल श्री महाकालेश्वर मंदिर में सालभर लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान में अक्सर सोना-चांदी के आभूषण और कीमती धातुएं शामिल होती हैं। अब इन धातुओं की शुद्धता की वैज्ञानिक जांच के लिए मंदिर परिसर में आधुनिक टंच मशीन लगाने का निर्णय लिया गया है। इससे न सिर्फ दान की वस्तुओं की असली कीमत पता चलेगी, बल्कि दान प्रक्रिया में पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो सकेगी।
अब मशीन से होगी परख
मंदिर प्रबंध समिति की हालिया बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब देश के अन्य प्रमुख मंदिरों की तर्ज पर महाकाल मंदिर में भी दान में प्राप्त होने वाले सोने-चांदी की शुद्धता की जांच के लिए XRF तकनीक पर आधारित टंच मशीन लगाई जाएगी। यह मशीन धातु की परतों में मौजूद विभिन्न तत्वों का सेकंडों में विश्लेषण कर उनकी गुणवत्ता दर्शा देती है।
मौजूदा प्रणाली भी रहेगी जारी
हालांकि मंदिर में पिछले 23 वर्षों से अशोक जड़िया व उनके पुत्र अतिन जड़िया परंपरागत तरीकों से धातुओं की जांच करते आ रहे हैं। वे मानते हैं कि अनुभवी नजरों से की गई जांच भी सटीक होती है। फिर भी तकनीकी सहायता से दोनों प्रक्रियाएं मिलकर अधिक सटीकता और पारदर्शिता ला सकेंगी।
क्यों जरूरी है टंच मशीन
दान में आई नकली या मिलावटी धातुओं की पहचान
धातु को नुकसान पहुंचाए बिना जांच
पारदर्शी और वैज्ञानिक प्रक्रिया
दान की वस्तुओं का वास्तविक मूल्यांकन
मंदिर संपत्ति का सटीक लेखा-जोखा
जांच के तरीके
टंच मशीन (XRF टेस्ट) – सबसे आधुनिक, तेज और नुकसान रहित तरीका
एसिड टेस्ट – सस्ता, लेकिन आंशिक रूप से सटीक
कैरट मापन – पारंपरिक विधि, लगभग सटीक अनुमान
फायर एस्से – सबसे विश्वसनीय लेकिन खर्चीला
अल्ट्रासोनिक टेस्ट – आभूषण की भीतरी संरचना की जांच
क्या है आगे की योजना
मंदिर समिति को टंच मशीन लगाने की स्वीकृति मिल गई है और जल्द ही मशीन की खरीद प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह पहल महाकाल मंदिर में दान की पवित्रता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।