महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के दोनों धड़ों के संभावित विलय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार बीजेपी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि एनसीपी के दोनों गुट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा बनना चाहते हैं तो पहले उन्हें आपस में एक होना होगा। इस पूरी कवायद को आगामी परिसीमन विधेयक और संसद में संख्या संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है।
एनसीपी के दोनों गुटों के विलय पर बढ़ी सियासी हलचल
महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों धड़ों के संभावित विलय की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। पार्टी का मानना है कि एनसीपी के दोनों गुट यदि एनडीए में शामिल होना चाहते हैं तो पहले उनका आपसी विलय होना चाहिए। अलग-अलग गुटों को गठबंधन में शामिल करने के पक्ष में बीजेपी फिलहाल नहीं दिखाई दे रही है।
परिसीमन विधेयक से जोड़ी जा रही रणनीति
राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को प्रस्तावित परिसीमन विधेयक से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि संसद में इस विधेयक को लेकर संख्या बल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सूत्रों का दावा है कि एनसीपी (शरद पवार गुट) के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों का समर्थन इस स्थिति में अहम साबित हो सकता है। यही कारण है कि दोनों गुटों को एक मंच पर लाने की कोशिशों की चर्चा तेज है।
विलय के बाद प्रतिनिधित्व का भी फॉर्मूला चर्चा में
सूत्रों के अनुसार यदि दोनों धड़ों का विलय होता है तो आगे चलकर दोनों पक्षों को सरकार और संगठन में संतुलित प्रतिनिधित्व देने पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में किसी भी दल की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल सभी चर्चाएं राजनीतिक सूत्रों और संभावित समीकरणों पर आधारित हैं।
नेताओं के बयान से बनी हुई है असमंजस की स्थिति
हाल के दिनों में हुई कुछ राजनीतिक मुलाकातों के बाद विलय की अटकलों को और बल मिला है। वहीं विपक्षी नेताओं की ओर से भी इस विषय पर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि विलय की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं, लेकिन संबंधित नेताओं ने समय-समय पर इससे इनकार भी किया है। ऐसे में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जा रही है।
कर्ज माफी के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा
बारामती में शरद पवार ने किसानों की कर्ज माफी को लेकर राज्य सरकार से घोषित समयसीमा का पालन करने की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार तय समय में कर्ज माफी लागू करती है तो उसका स्वागत किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होने की स्थिति में राज्यव्यापी आंदोलन पर विचार किया जाएगा। वहीं एनसीपी में संभावित टूट या विलय के सवाल पर उन्होंने फिलहाल कोई विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया।