Maharashtra Politics: मुंबई के मीरा रोड पर प्रस्तावित मराठी स्वाभिमान मोर्चे को अनुमति न मिलने से महाराष्ट्र की सियासत में हलचल मच गई है। एकनाथ शिंदे गुट के मंत्री प्रताप सरनाईक ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताते हुए पुलिस पर पक्षपात के आरोप लगाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि मराठी समुदाय के आंदोलन को दबाना गलत है। इस मसले ने महायुति में आंतरिक मतभेद को उजागर कर दिया है, जहां खुद सत्ताधारी दलों के नेता आमने-सामने आ गए हैं।
मोर्चे को नहीं मिली अनुमति, भड़के मंत्री
मीरा रोड पर मंगलवार को आयोजित होने वाले मराठी स्वाभिमान मोर्चे को पुलिस ने अनुमति नहीं दी। इससे शिंदे गुट के नेता और मंत्री प्रताप सरनाईक आक्रोशित हो गए। उन्होंने कहा कि जब अन्य समुदायों को प्रदर्शन की अनुमति दी जा सकती है, तो मराठी लोगों को क्यों नहीं?
"मैं पहले मराठी हूं, फिर मंत्री"
सरनाईक ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा, "मैं मंत्री बाद में हूं, पहले मराठी हूं। पुलिस को किसी एक पार्टी के एजेंडे पर नहीं चलना चाहिए। अगर हिम्मत है तो हमें रोककर दिखाएं या गिरफ्तार करें।" उन्होंने यह भी कहा कि वे इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से बात करेंगे।
अलग सुर में दिखे शिवसेना के दूसरे मंत्री
जहां एक ओर सरनाईक हमलावर दिखे, वहीं शिंदे गुट के ही दूसरे मंत्री योगेश कदम ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर मोर्चा आयोजित होना था, वहां कुछ प्रशासनिक समस्याएं थीं, स्थान बदलने पर अनुमति मिल सकती है।
मनसे ने दी चेतावनी
मराठी अस्मिता से जुड़े इस आंदोलन पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने भी समर्थन दिया है। मनसे कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि मराठी भाषा और संस्कृति का विरोध करने वालों को करारा जवाब दिया जाएगा।
मराठी पहचान के समर्थन में आंदोलन
मीरा-भायंदर क्षेत्र में होने वाला यह मोर्चा मराठी भाषा, संस्कृति और अधिकारों को लेकर आयोजित किया जा रहा था। शहर में इसके लिए पोस्टर लगाए गए थे और आम जनता से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की गई थी।