BMC elections: मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों की आहट के बीच महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विवाद उभरता दिख रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता और राज्य के खेल मंत्री माणिकराव कोकाटे की मुश्किलें अचानक बढ़ गई हैं। सदनिका घोटाला मामले में नासिक जिला न्यायालय द्वारा सुनाई गई दो साल की सजा को बरकरार रखे जाने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। अदालत के फैसले के तुरंत बाद कोकाटे की गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू होने की खबरों ने सत्ताधारी गठबंधन में हलचल पैदा कर दी है। ऐसे समय में, जब शहरी निकाय चुनाव नजदीक हैं, यह मामला सरकार और खासतौर पर अजित पवार के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है।
इस्तीफे और विभाग पर मंथन
कोकाटे के खिलाफ संभावित गिरफ्तारी वारंट को देखते हुए उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उनके सरकारी निवास ‘वर्षा’ में मुलाकात की। इस बैठक में पूरे प्रकरण की कानूनी स्थिति और आगे की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, अजित पवार ने मुख्यमंत्री को मामले की पृष्ठभूमि से अवगत कराया, जिसके बाद फडणवीस ने स्पष्ट किया कि कोकाटे के इस्तीफे को लेकर अंतिम निर्णय अजित पवार को ही लेना होगा। बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि यदि मंत्री पद रिक्त होता है तो संबंधित विभाग की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए। यह चर्चा इस बात का संकेत मानी जा रही है कि सरकार हर संभावित स्थिति के लिए तैयार रहना चाहती है।
हाई कोर्ट से राहत ही आखिरी उम्मीद
राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि माणिकराव कोकाटे का मंत्री पद अब काफी हद तक हाई कोर्ट के फैसले पर निर्भर है। यदि उच्च न्यायालय निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाता है, तभी उनका पद बच पाएगा। अन्यथा इस्तीफा लगभग तय माना जा रहा है। इससे पहले भी अजित पवार गुट के एक अन्य मंत्री धनंजय मुंडे को विवादों के चलते पद छोड़ना पड़ा था, जिससे विपक्ष सरकार पर लगातार सवाल उठाता रहा है। ऐसे में कोकाटे का मामला सत्ताधारी दल के लिए नई चुनौती बन सकता है। अब सबकी निगाहें अदालत के अगले कदम और अजित पवार के राजनीतिक फैसले पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।