महाशिवरात्रि 2026 पर मध्यप्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। बाबा महाकाल ने भक्तों को दिव्य ‘शिव तांडव’ स्वरूप में दर्शन दिए। विशेष भस्मारती के साथ मंदिर के पट रात 2:30 बजे से 44 घंटे तक खुले रहे। अनुमान है कि इस दौरान करीब 10 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
विशेष भस्मारती और 44 घंटे खुले पट
महाशिवरात्रि की पावन बेला में तड़के 2:30 बजे पंचामृत अभिषेक के साथ बाबा महाकाल की विशेष भस्मारती संपन्न हुई। गर्भगृह के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए, जो लगातार 44 घंटे खुले रहे। देश के कोने-कोने से पहुंचे भक्तों ने लंबी कतारों में खड़े होकर दर्शन किए। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, जल व्यवस्था और दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखा।
‘शिव तांडव’ स्वरूप ने मोहा मन
शिवनवरात्रि उत्सव के तहत बाबा महाकाल ने अलग-अलग दिव्य रूपों में दर्शन दिए, लेकिन ‘शिव तांडव’ स्वरूप सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र रहा। इस रौद्र और नृत्यात्मक रूप में भगवान को भव्य मुकुट, अलंकार और नवीन वस्त्रों से सजाया गया। यह स्वरूप भगवान शिव के शक्ति, सृजन और संहार के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। भक्त इस अद्भुत दर्शन से भाव-विभोर नजर आए।
पंचामृत अभिषेक और दिव्य श्रृंगार
भस्मारती से पूर्व बाबा का पंचामृत अभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और खांडसारी शक्कर शामिल रहे। इसके बाद चंदन लेप, सुगंधित द्रव्य और विजया (भांग) अर्पित की गई। श्वेत वस्त्रों और फूलों की मालाओं से सजे बाबा के दर्शन ने भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।
सेहरा प्रसाद और विशेष परंपरा
महाशिवरात्रि के अगले दिन बाबा का सेहरा सजाया जाता है और दोपहर में विशेष भस्म आरती होती है। यह परंपरा वर्ष में केवल एक बार निभाई जाती है। सेहरे के फूल-पत्तों को प्रसाद रूप में वितरित किया जाता है। मान्यता है कि इसे घर में रखने से सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। श्रद्धालु इस प्रसाद को अत्यंत श्रद्धा से ग्रहण करते हैं।
दिनभर चले अनुष्ठान और रात्रि महाअभिषेक
भस्मारती के बाद दद्योदक आरती, भोग आरती और विभिन्न शासकीय पूजन-अभिषेक संपन्न हुए। शाम को नित्य संध्या आरती और रात्रि में कोटितीर्थ कुंड तट पर विशेष पूजन किया गया। रात 10:30 बजे से पूरी रात्रि महाअभिषेक चला, जिसमें 11 ब्राह्मणों ने रुद्रपाठ और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक किया। पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा।