जनपद में पुलिस महकमे को झकझोर देने वाला वसूली कांड सामने आया है। आरोपी को छोड़ने के नाम पर 6 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में सिकंदराबाद कोतवाली के कोतवाल समेत 7 पुलिसकर्मियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है।
शिकायतकर्ता से आरोपी को छोड़ने के एवज में 6 लाख रुपये की मांग
पहले पुलिस कप्तान दिनेश कुमार सिंह ने सभी को लाइन हाजिर किया, लेकिन महज 3 घंटे के भीतर डीआईजी कलानिधि नैथानी ने सभी को निलंबित कर कड़ा संदेश दे दिया। बताया जा रहा है कि सिकंदराबाद क्षेत्र से जुड़े एक मामले में शिकायतकर्ता से आरोपी को छोड़ने के एवज में 6 लाख रुपये की मांग की गई थी। पीड़ित ने इसकी शिकायत सीधे डीआईजी से की। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी ने तत्काल जांच के आदेश दिए।
सभी आरोपित पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया
डीआईजी के निर्देश पर सीओ भास्कर मिश्रा ने पूरे प्रकरण की जांच की, जिसमें प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे कप्तान दिनेश कुमार सिंह ने कोतवाल समेत सभी आरोपित पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया। हालांकि, मामला यहीं नहीं रुका। डीआईजी कलानिधि नैथानी ने सख्त रुख अपनाते हुए महज 3 घंटे के भीतर ही सभी को निलंबित कर दिया। इस त्वरित कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं
निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में प्रभारी निरीक्षक नीरज मलिक, वरिष्ठ उपनिरीक्षक अरुण कुमार, चौकी प्रभारी जेल अमित कुमार और आरक्षी प्रवेश बैसला, सुमित व विपुल कुमार शामिल हैं। डीआईजी ने साफ किया कि भ्रष्टाचार और वसूली जैसे मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या संलिप्तता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई को पुलिस विभाग में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। डीआईजी को भेजे सबूत बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता ने वसूली से संबंधित वीडियो व अन्य जरूरी कागजात सीधे डीआईजी को भेजे थे। जिसकी जांच की गई थी। जांच में सही पाए जाने पर ये कठोर कार्रवाई की गई थी।