मेरठ में किसान नेता डॉ. दिग्विजय भाटी और उनके साथी मोहित जाटव के साथ कथित मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। दोनों ने पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मेरठ पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए सिविल लाइंस थाना प्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है। वहीं, पूरे प्रकरण की जांच सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह को सौंपी गई है।
आरोपों के बाद पुलिस प्रशासन ने लिया सख्त फैसला
भारतीय किसान यूनियन (बीआर आंबेडकर) के अध्यक्ष डॉ. दिग्विजय भाटी और उनके साथी मोहित जाटव ने आरोप लगाया था कि उनके साथ एसएसपी कार्यालय और एसओजी कार्यालय में मारपीट की गई। दोनों ने तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय और सिविल लाइंस थाना प्रभारी अखिलेश कुमार गौड़ पर गंभीर आरोप लगाए। दिग्विजय भाटी ने अपनी चोटों से संबंधित वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया था, जिसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया।
SHO अखिलेश गौड़ समेत आठ पुलिसकर्मी लाइन हाजिर
नवागत एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार देर रात सिविल लाइंस थाना प्रभारी अखिलेश कुमार गौड़ समेत कुल आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, यह कदम जांच को निष्पक्ष और प्रभावी बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में भी इस मामले को लेकर हलचल बढ़ गई है।
सहारनपुर के DIG अभिषेक सिंह ने शुरू की जांच
मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर ने प्रकरण की जांच सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह को सौंपी है। डीआईजी मेरठ पहुंचकर मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल शुरू कर चुके हैं। जांच के दौरान संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान, घटनाक्रम से जुड़े रिकॉर्ड और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की समीक्षा की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस रिकॉर्ड में हादसे का अलग दावा
दूसरी ओर, सिविल लाइंस थाने की जनरल डायरी में दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव को स्कूटी फिसलने के कारण चोट लगने की बात दर्ज होने का दावा किया गया है। यानी पुलिस रिकॉर्ड और किसान नेता की ओर से लगाए गए आरोपों में अंतर दिखाई दे रहा है। ऐसे में डीआईजी स्तर की जांच इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दिग्विजय भाटी ने अपने वीडियो में यह भी दावा किया था कि उनके आरोप सामने आने के बाद तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय का तबादला हुआ।
दिग्विजय भाटी के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई भी हुई थी
दिग्विजय भाटी मूल रूप से संभल के रहने वाले बताए जाते हैं। जानकारी के मुताबिक, जुलाई के अंत में अमरोहा पुलिस ने उन्हें छह महीने के लिए जिला बदर किया था। हालांकि, मौजूदा मामले में उनके खिलाफ पहले की गई कार्रवाई और पुलिस से मारपीट के आरोप अलग-अलग विषय हैं। अब सभी की निगाहें डीआईजी अभिषेक सिंह की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि किसान नेता और उनके साथी के लगाए आरोपों में कितनी सच्चाई है और घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका क्या रही।