SIR date extended : देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र समेत छह राज्यों में वोटर लिस्ट तैयार करने की समयसीमा में बदलाव किया है। इस फैसले के तहत मतदाताओं को अपने नाम जुड़वाने, गलतियों में सुधार कराने और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। चुनाव आयोग ने संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के अनुरोध के बाद यह कदम उठाया है। नई व्यवस्था से उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो किसी कारणवश निर्धारित समय में अपनी आपत्तियां दर्ज नहीं करा पाए थे।
छह राज्यों में बदला SIR का कार्यक्रम
चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और नागालैंड में विशेष गहन पुनरीक्षण की समयसीमा में संशोधन किया है। आयोग की ओर से 29 अक्टूबर को जारी अलग-अलग निर्देशों में नई तारीखों की जानकारी दी गई। संशोधित कार्यक्रम के मुताबिक महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और नागालैंड में अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी। वहीं दिल्ली के मतदाताओं को फाइनल वोटर लिस्ट के लिए 22 दिसंबर तक इंतजार करना होगा। आयोग ने अधिकारियों को नए कार्यक्रम की जानकारी राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए हैं।
दिल्ली और महाराष्ट्र के मतदाताओं को मिली ज्यादा मोहलत
दिल्ली में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर से बढ़ाकर 25 नवंबर कर दी गई है। पहले इन आवेदनों के निस्तारण की प्रक्रिया 30 नवंबर तक पूरी होनी थी, लेकिन अब इसके लिए 15 दिसंबर तक का समय दिया गया है। इसके बाद 22 दिसंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी। महाराष्ट्र में भी मतदाताओं को राहत मिली है। यहां दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा 26 अक्टूबर से बढ़ाकर 13 नवंबर कर दी गई है। वहीं आवेदनों पर सुनवाई और उनके निस्तारण की प्रक्रिया अब 25 नवंबर तक चलेगी। महाराष्ट्र की अंतिम वोटर लिस्ट 30 नवंबर को जारी होगी।
हरियाणा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी बदलाव
चुनाव आयोग ने बाकी राज्यों के लिए भी संशोधित कार्यक्रम जारी किया है। हरियाणा और आंध्र प्रदेश में दावों और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया अब 20 नवंबर तक चलेगी। तेलंगाना में इसके लिए 26 नवंबर तक का समय निर्धारित किया गया है, जबकि नागालैंड में यह प्रक्रिया 25 नवंबर तक जारी रहेगी। इन सभी राज्यों में अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी। आयोग का उद्देश्य पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाली शिकायतों और दस्तावेजों की जांच के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध कराना है, ताकि मतदाता सूची को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सके।
SIR को लेकर विवाद के बीच अहम फैसला
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर देश के कई हिस्सों में राजनीतिक दलों और मतदाताओं के बीच सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची से नाम हटने की आशंका और प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई है। ऐसे माहौल में चुनाव आयोग की ओर से समयसीमा बढ़ाने के फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर से समय बढ़ाने पर विचार करने के निर्देश के बाद यह निर्णय सामने आया है। अब मतदाताओं के पास अपने नाम की स्थिति जांचने, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने और किसी भी तरह की गड़बड़ी पर शिकायत दर्ज कराने का अतिरिक्त अवसर होगा। आयोग की कोशिश है कि अंतिम सूची में किसी भी पात्र मतदाता का नाम छूटने न पाए और अपात्र प्रविष्टियों की भी जांच हो सके।