Poonch जिले के सुरनकोट में दरुल उलूम रज़विया सुल्तानिया, जामिया मस्जिद में शनिवार को 250 से अधिक इमामों और निकाह पढ़ाने वाले मौलवियों की बड़ी बैठक हुई। इसमें शादियों में डीजे, तेज संगीत, नाच-गाना और गैर-इस्लामी रस्मों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का बड़ा फैसला लिया गया। जमात-ए-अहले सुन्नत सुबह जम्मू के बैनर तले बुलाई गई इस बैठक में स्पष्ट कर दिया गया कि ऐसे समारोहों का धार्मिक और सामाजिक स्तर पर बहिष्कार होगा और किसी मौलवी को इसमें निकाह पढ़ाने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।
गरीब परिवारों को पूरी छूट दी गई
बैठक में यह भी तय किया गया कि हर इलाके में निकाह सिर्फ उसी इलाके का स्थानीय इमाम पढ़ाएगा और अगर कोई बाहरी मौलवी निकाह पढ़ाने आएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी तथा उसका रजिस्टर भी ज़ब्त किया जा सकता है। इज्तिमा में निकाह फ़ीस को लेकर नया नियम बनाते हुए अमीर परिवारों के लिए ₹11,000 फ़ीस तय की गई, जबकि गरीब परिवारों को पूरी छूट दी गई।
न्यूनतम वेतन निर्धारित करने की अपील
इसके साथ ही मदरसों और मस्जिदों में काम करने वाले उस्तादों व इमामों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए न्यूनतम वेतन निर्धारित करने की अपील की गई। मदरसा शिक्षकों के लिए ₹15,000 और मस्जिद इमामों के लिए ₹20,000 मानदेय प्रस्तावित किया गया। उलेमाओं का कहना था कि दिखावा और फिजूलखर्ची समाज पर भारी बोझ बनते जा रहे हैं।
शादी-ब्याह को सादगी से अदा करें
अंत में उलेमाओं ने लोगों से अपील की कि शादी-ब्याह को सादगी, सुन्नत और संयम के साथ अदा करें, मेहमानों की संख्या सीमित रखें और खाने की सिर्फ दो वैराइटी पर जोर दें—ताकि हर वर्ग इन नियमों को आसानी से निभा सके और समाज में बराबरी व सादगी को बढ़ावा मिले