प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन के मित्र असगरअली वोरा से जुड़े जमीन विवाद में नया घटनाक्रम सामने आया है। मीरा-भाईंदर क्षेत्र की एक विवादित जमीन को लेकर चल रहे मामले में निर्माण अनुमति वापस करने और पूर्व में दर्ज पुलिस शिकायत को लौटाने की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है। यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब 81 वर्षीय असगरअली वोरा ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर मामले में हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
निर्माण अनुमति लौटाने की पहल
जानकारी के अनुसार, संबंधित निर्माण कंपनी ने मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के नगररचना विभाग को पत्र देकर विवादित भूमि से जुड़ी निर्माण अनुमति (सीसी) सरेंडर करने का अनुरोध किया है। कंपनी ने अनुमति के लिए जमा की गई फीस वापस करने की मांग भी रखी है। पत्र में जमीन को लेकर चल रहे विवाद का उल्लेख किया गया है। बताया गया कि संबंधित भूखंड पर पूर्व में पंजीकृत दस्तावेजों के आधार पर लेन-देन हुआ था और वर्ष 2026 में निर्माण की स्वीकृति प्राप्त की गई थी।
पुलिस शिकायत वापस लेने की तैयारी
जमीन विवाद के बीच असगरअली वोरा के खिलाफ पहले दर्ज कराई गई पुलिस शिकायत को वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू होने की बात कही जा रही है। इससे संकेत मिलते हैं कि विवाद को सुलझाने की दिशा में दोनों पक्षों के स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, जमीन के अंतिम स्वामित्व और कब्जे से जुड़े सभी पहलुओं पर संबंधित विभागों और दस्तावेजों के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा।
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद बढ़ी गतिविधियां
असगरअली वोरा ने 8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर अपनी शिकायत रखी थी। बताया जाता है कि दोनों ने गुजरात के वडनगर स्थित बी.एन. स्कूल में साथ शिक्षा प्राप्त की थी। मुलाकात के बाद राज्य स्तर पर भी इस मामले को लेकर बैठकों का दौर शुरू हुआ। मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में बैठक आयोजित की गई, जिसमें संबंधित पक्षों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया तथा विवाद के समाधान पर चर्चा की गई।
कई वर्षों से चल रहा है विवाद
असगरअली वोरा का कहना है कि उन्होंने वर्ष 1989 में मीरा-भाईंदर के नवघर क्षेत्र में जमीन खरीदी थी और बाद के वर्षों में उस पर विवाद खड़ा हो गया। दूसरी ओर, संबंधित कंपनी का दावा है कि उसने वर्ष 2019 में वैध दस्तावेजों के आधार पर भूमि का क्रय किया था। अब निर्माण अनुमति वापस करने और कब्जा छोड़ने संबंधी पहल के बाद इस लंबे समय से चल रहे विवाद के समाधान की संभावना बढ़ी है। मामले से जुड़े अंतिम निर्णय पर सभी की नजर बनी हुई है।