दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित मारपीट के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत दे दी है। कोर्ट के इस आदेश से भारद्वाज को फिलहाल राहत मिली है। वह इस मामले में न्यायिक हिरासत में थे। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। यह मामला जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन से जुड़ा है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज ने एक छात्र कार्यकर्ता के पिता के संग मारपीट की थी। मामले ने उस वक्त काफी सुर्खियां बटोरी थीं। शिकायत पक्ष की ओर से भारद्वाज के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जबकि बचाव पक्ष ने उनकी गिरफ्तारी को राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ते हुए सवाल उठाए थे।
फिर न्यायिक हिरासत में भेजा गया
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी सितंबर की शुरुआत में बुलंदशहर से हुई थी। इसके बाद उन्हें दिल्ली की अदालत में पेश किया गया, जहां पहले पुलिस हिरासत और फिर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। मामले में उनके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। बाद में एक अलग एफआईआर में पॉक्सो एक्ट से जुड़े प्रावधान भी लगाए गए।
अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया
इससे पहले स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का भी रुख किया था। हाईकोर्ट ने उनकी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई की थी। वहीं, पटियाला हाउस कोर्ट में दाखिल जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था और मंगलवार को अंतरिम जमानत देने का फैसला सुनाया।
मामले की परिस्थितियों पर सवाल उठाए
शिकायत पक्ष ने अदालत के सामने कथित मारपीट से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्यों का हवाला दिया, जबकि बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी और मामले की परिस्थितियों पर सवाल उठाए। अब तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत के दौरान मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी। अंतरिम जमानत का अर्थ यह है कि अदालत ने सीमित अवधि के लिए राहत दी है; इससे मामले के आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं होता।