East Delhi News: दिल्ली पुलिस के पूर्वी जिले की साइबर थाना पुलिस ने पर्सनल लोन, बीमा पॉलिसी और नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह का कथित सरगना उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित सेक्टर-2 में फर्जी लोन एवं वित्तीय सेवाओं का कार्यालय चला रहा था। गिरोह के सदस्य आकर्षक शर्तों पर पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों से प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क के नाम पर रकम वसूलते थे। इसके बाद ठगी की रकम को कमीशन पर उपलब्ध कराए गए बैंक खातों के माध्यम से इधर-उधर किया जाता था।
कब्जे से सात मोबाइल फोन बरामद किए
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इसके अलावा एक आरोपी के पास से दूसरे आरोपी के नाम की चेकबुक, पासबुक और आधार कार्ड भी बरामद हुआ है। जांच में कर्नाटक बैंक की लक्ष्मी नगर शाखा में संचालित एक संदिग्ध बैंक खाते में साइबर ठगी की 2 लाख 60 हजार 675 रुपये की रकम जमा होने का पता चला है। पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त राजीव कुमार के अनुसार, इस मामले की शुरुआत तमिलनाडु के डिंडीगुल निवासी बालामुरुगन की शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे मुद्रा फाइनेंस के माध्यम से पर्सनल लोन दिलाने का झांसा दिया गया था। आरोपियों ने लोन की प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर उससे 39,020 रुपये प्रोसेसिंग फीस के रूप में जमा करा लिए, लेकिन रकम लेने के बाद न तो उसे लोन दिया गया और न ही वादा की गई कोई सुविधा उपलब्ध कराई गई।
एनसीआरपी पर शिकायत दर्ज कराई
पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर शिकायत दर्ज कराई। साइबर शिकायतों की जांच के दौरान दिल्ली के लक्ष्मी नगर स्थित कर्नाटक बैंक के एक संदिग्ध खाते की पहचान हुई। बैंक स्टेटमेंट की गहन जांच में इस खाते में कुल 2,60,675 रुपये के संदिग्ध लेन-देन सामने आए। इसके बाद 29 अक्टूबर 2026 को साइबर थाना पूर्वी जिले में एफआईआर नंबर 86/2026, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 112(2)/318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आया कि गिरोह सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। इसमें एक आरोपी फर्जी लोन कार्यालय के माध्यम से लोगों को ठगी का शिकार बनाता था, दूसरा कमीशन पर बैंक खाते उपलब्ध कराता था, जबकि तीसरा अपने बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए करने देता था।
रवि शर्मा गिरोह का मुख्य संचालक
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में रवि शर्मा (42) निवासी सेक्टर-23, नोएडा, उत्तर प्रदेश को कथित तौर पर गिरोह का मुख्य संचालक बताया गया है। वह नोएडा के सेक्टर-2 में फर्जी लोन और वित्तीय सेवाओं का कार्यालय चला रहा था। यहां से लोगों को पर्सनल लोन, बीमा पॉलिसी और रोजगार दिलाने का प्रलोभन दिया जाता था। कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों को भी कथित तौर पर यही बताया जाता था कि वहां वैध लोन, बीमा और नौकरी संबंधी सेवाएं दी जा रही हैं।
दूसरा आरोपी गौरव (33), निवासी त्रिलोकपुरी, दिल्ली, कथित तौर पर बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम करता था। जांच में पता चला कि वह कमीशन का लालच देकर अपने चचेरे भाई सन्नी कश्यप से अलग-अलग बैंकों में कई खाते खुलवाता था। इन खातों की चेकबुक, पासबुक, डेबिट कार्ड और अन्य बैंकिंग दस्तावेज अपने पास रखता था और कथित तौर पर उन्हें रवि शर्मा को उपलब्ध कराता था। तीसरा आरोपी सन्नी कश्यप (40), निवासी त्रिलोकपुरी, दिल्ली, कथित तौर पर कमीशन के बदले अपने बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए करने देता था। जांच में यह भी सामने आया कि गौरव ने एक परिचित के माध्यम से कथित रूप से बहाने से सिम कार्ड हासिल किया और उसे सन्नी के बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबर के रूप में इस्तेमाल किया, ताकि बैंकिंग अलर्ट और लेन-देन पर नियंत्रण रखा जा सके।
खाते के स्टेटमेंट और केवाईसी दस्तावेज हासिल किए
पुलिस ने जांच के दौरान कर्नाटक बैंक से संबंधित खाते के स्टेटमेंट और केवाईसी दस्तावेज हासिल किए। वित्तीय लेन-देन की पड़ताल में पता चला कि संदिग्ध खाते में 2,60,675 रुपये जमा हुए थे। इसके बाद रकम को अलग-अलग माध्यमों से आगे भेजा गया और पूर्वी दिल्ली के इलाकों में एटीएम के जरिए नकदी निकालने के सुराग भी मिले। आरोपियों रवि शर्मा और गौरव के बीच हुई व्हाट्सऐप बातचीत भी बरामद कर उसका विश्लेषण किया गया। इन डिजिटल साक्ष्यों से दोनों के कथित आपसी संपर्क और समन्वय के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं।
सात मोबाइल फोन और बैंकिंग दस्तावेज बरामद
पुलिस ने रवि शर्मा के कब्जे से सात मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर ठगी की गतिविधियों में किया जाता था। वहीं गौरव के पास से सन्नी कश्यप के नाम की एक चेकबुक, एक पासबुक और आधार कार्ड बरामद किया गया है।
ठगी की पूरी रकम का नेटवर्क खंगाल रही
पुलिस का कहना है कि तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी वित्तीय लेन-देन की पड़ताल, डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण और लगातार की गई जांच के आधार पर की गई है। अब पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने, अतिरिक्त म्यूल बैंक खातों का पता लगाने और बरामद मोबाइल फोन की जांच के जरिए ठगी की पूरी रकम का नेटवर्क खंगाल रही है।
इस अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश पूर्वी जिले के पुलिस उपायुक्त राजीव कुमार, के नेतृत्व और मार्गदर्शन में किया गया। जांच एवं कार्रवाई में साइबर थाना पूर्वी जिले की टीम के एएसआई शिव कुमार, हेड कांस्टेबल अनुराग, हेड कांस्टेबल योगेश कुमार और हेड कांस्टेबल विशाल सांगवान शामिल रहे। टीम ने थाना साइबर ईस्ट के एसएचओ इंस्पेक्टर पवन यादव के नेतृत्व में कार्रवाई की। वहीं एसीपी ऑपरेशंस, पूर्वी जिला महावीर प्रसाद की निगरानी में जांच को आगे बढ़ाया गया।
पुलिस की आम लोगों से अपील
पूर्वी जिला पुलिस ने लोगों को फर्जी लोन और ऑनलाइन वित्तीय सेवाओं के नाम पर होने वाली ठगी से सावधान रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि किसी भी अनजान व्यक्ति या संस्था को लोन दिलाने के नाम पर अग्रिम प्रोसेसिंग फीस अथवा अन्य शुल्क जमा न कराएं। लोन की पेशकश की पुष्टि संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था की आधिकारिक वेबसाइट अथवा अधिकृत माध्यम से जरूर करें। पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि कमीशन के लालच में किसी को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी या सिम कार्ड न दें। किसी दूसरे व्यक्ति को अपने खाते में रकम जमा कराने या वहां से ट्रांसफर करने की अनुमति देना भी गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है।
यहां करें शिकायत दर्ज
यदि कोई व्यक्ति साइबर वित्तीय ठगी का शिकार होता है तो उसे तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए अथवा आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। पूर्वी जिला पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध के संगठित नेटवर्क को ध्वस्त करने और नागरिकों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रखने के लिए अभियान जारी रहेगा।