नेपाल सरकार ने अगस्त में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए छह प्रमुख नदी बेसिनों में बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली (फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम) का विस्तार करने और चार उच्च जोखिम वाली हिमनदीय झीलों (ग्लेशियल लेक्स) के जलस्तर को कम करने की योजना बनाई है।
1,500 लोगों की जान चली गई
26 अगस्त को आई बाढ़ में करीब 1,500 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 5,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। नेपाल सरकार की प्रारंभिक रैपिड डैमेज एंड नीड्स असेसमेंट (आरडीएनए) रिपोर्ट के अनुसार, इस आपदा से करीब 1.81 अरब डॉलर की संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
भोटेकोशी और त्रिशूली नदी बेसिन में आई बाढ़ से जलविद्युत परियोजनाओं, सौर ऊर्जा संयंत्रों, बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क और परिवहन ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। ऊर्जा क्षेत्र, विशेष रूप से जलविद्युत परियोजनाएं, सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहीं।
छह नदी बेसिनों में बाढ़
सरकारी श्वेत पत्र के मुताबिक, 2022 से 2028 तक चलने वाली प्रायोरिटी रिवर बेसिन फ्लड रिस्क मैनेजमेंट परियोजना के तहत छह नदी बेसिनों में बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित की जाएगी। इस परियोजना पर 75.4 लाख डॉलर खर्च किए जाएंगे। परियोजना के दायरे में मावा-रतुवा, बक्राहा, लखनदेही, ईस्ट राप्ती, वेस्ट राप्ती और मोहना-खुटिया नदी बेसिन शामिल हैं।
चेतावनी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि हर वर्ष मध्य मई से मध्य अक्टूबर तक, जो नेपाल में मानसून का मुख्य मौसम होता है, 24 घंटे बाढ़ पूर्वानुमान और चेतावनी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
निचले इलाकों में विनाशकारी बाढ़
हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इससे हिमनदीय झीलों की स्थिरता, हिमस्खलन और निचले इलाकों में विनाशकारी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। इसी को देखते हुए नेपाल सरकार ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) संजीवनी परियोजना शुरू करेगी।
अनुमानित लागत 4.99 करोड़ डॉलर
इसके तहत चार उच्च जोखिम वाली झीलों थुलागी, लोअर बरुण, लुमडिंग त्शो और होंगू-2 के जलस्तर को कम किया जाएगा। यह परियोजना 2026 से 2033 तक चलेगी और इसकी अनुमानित लागत 4.99 करोड़ डॉलर है।
तकनीकों को प्राथमिकता देने की योजना
नेपाल पहले भी त्सो रोल्पा और इम्जा झील का जलस्तर कम कर चुका है, ताकि हिमनदीय झील फटने से होने वाली बाढ़ के खतरे को कम किया जा सके। इसके अलावा, जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग मौसम और बाढ़ संबंधी पूर्वानुमान को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग तकनीकों को प्राथमिकता देने की योजना बना रहा है।