UCC in West Bengal: पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की प्रक्रिया ने औपचारिक रूप ले लिया है। राज्य सरकार ने प्रस्तावित पश्चिम बंगाल यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक-2026 के मसौदे की समीक्षा और सुझावों के लिए नौ सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। सरकार ने समिति को निर्धारित समय में अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने का दायित्व दिया है।
चार सप्ताह में देनी होगी प्रारंभिक रिपोर्ट
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार समिति को प्रस्तावित कानून के मसौदे का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें चार सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करनी होंगी। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार आगामी विधानसभा सत्र में यूसीसी विधेयक पेश करने पर विचार कर सकती है। समिति राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर नागरिकों, सामाजिक संगठनों और संबंधित पक्षों की राय भी लेगी, ताकि व्यापक सुझावों के आधार पर अंतिम मसौदा तैयार किया जा सके।
समिति में कई प्रमुख नाम शामिल
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व वाली समिति में प्रशासनिक, कानूनी और शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। समिति में पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, विधि विशेषज्ञ, शिक्षाविद और उच्च न्यायालय से जुड़े सदस्य भी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल करने का उद्देश्य कानून के हर पहलू पर संतुलित और व्यापक विचार करना है।
इन मुद्दों पर हो सकता है विचार
सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित यूसीसी मसौदे में एक से अधिक विवाह पर रोक, महिलाओं और पुरुषों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार, बाल विवाह रोकने के उपाय तथा लिव-इन रिलेशनशिप के लिए नियामक प्रावधान जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा सरकार उत्तराखंड, गुजरात और असम में लागू या प्रस्तावित यूसीसी मॉडल का भी अध्ययन कर रही है। आदिवासी समुदायों को कानून के दायरे से बाहर रखने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।
यूसीसी को लेकर तेज हुई राजनीतिक बहस
यूसीसी को लेकर राज्य में राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है। सरकार का कहना है कि सभी संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कानून लाया जाएगा। वहीं, विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं और व्यापक जनपरामर्श की मांग की है। उनका कहना है कि व्यक्तिगत और पारिवारिक कानूनों से जुड़े विषयों पर निर्णय लेने से पहले समाज के सभी वर्गों की राय लेना आवश्यक है। आने वाले दिनों में समिति की रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर सभी की नजर रहेगी।