Major win for India at BRICS: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने BRICS शिखर सम्मेलन को भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय गंभीर मतभेदों, युद्ध और बढ़ते ध्रुवीकरण से गुजर रही है, इसके बावजूद भारत सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाने में सफल रहा। जयशंकर के मुताबिक, सम्मेलन ने यह भी साबित किया कि भारत बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को प्रभावी तरीके से आयोजित करने और अलग-अलग विचार रखने वाले देशों को एक मंच पर लाने में सक्षम है।
32 प्रतिनिधिमंडलों ने लिया हिस्सा
जयशंकर ने बताया कि सम्मेलन में कुल 32 प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया। इनमें 11 सदस्य देशों, 10 साझेदार देशों, चार क्षेत्रीय संगठनों और सात अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई देशों के शीर्ष नेता सम्मेलन में पहुंचे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस समेत अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों की मौजूदगी भी रही।
VIDEO | Delhi: On the successful completion of the BRICS Summit 2026, External Affairs Minister S. Jaishankar says, “The whole nation, and indeed the world, saw the success of the BRICS India Summit 2026 yesterday. As you all know, there were 32 delegations, including 11 member… pic.twitter.com/CiKhDtmcxk
— Press Trust of India (@PTI_News) September 14, 2026
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मुश्किल हालात में बनी सहमति
विदेश मंत्री ने कहा कि BRICS सम्मेलन ऐसे समय हुआ जब दुनिया कई बड़े संघर्षों और देशों के बीच गहरे मतभेदों का सामना कर रही है। इसके बावजूद भारत सभी भागीदार देशों को एक साझा रुख पर लाने में कामयाब रहा। उन्होंने खास तौर पर पश्चिम एशिया के विवाद को सम्मेलन के सबसे कठिन मुद्दों में से एक बताया। जयशंकर के अनुसार, इस मुद्दे पर भी सभी देशों की सहमति से एक साझा बयान जारी किया गया, जो भारत की कूटनीतिक क्षमता को दिखाता है।
शांति और स्थिरता पर दिया जोर
जयशंकर ने बताया कि BRICS नेताओं ने शांति, सुरक्षा और स्थिरता की जरूरत पर जोर दिया। इसके साथ वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाए रखने, ऊर्जा के प्रवाह को जारी रखने और नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की बात भी सामने आई। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों के बीच मतभेद होने के बावजूद साझा हितों पर बातचीत और सहमति बनाने की कोशिश सम्मेलन की बड़ी उपलब्धि रही।
अर्थव्यवस्था और ग्लोबल साउथ पर फोकस
विदेश मंत्री के मुताबिक, सम्मेलन का एजेंडा अर्थव्यवस्था, विकास और तकनीक के साथ ग्लोबल साउथ के हितों पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर BRICS का साझा संदेश काफी मजबूत रहा। जयशंकर ने इसे बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारत की बढ़ती भूमिका का संकेत बताया। वहीं अमेरिका के दक्षिण एशिया मामलों के विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने भी नई दिल्ली घोषणा को भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताया है।