हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी, बुधवार को पूरे देश में श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जाएगा। इसी दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे शुभ परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है। मकर संक्रांति पर किया गया दान, जप और पुण्य कर्म विशेष फलदायी होता है। इस बार संक्रांति का स्वरूप और वाहन कई अहम संकेत दे रहा है।
किस स्वरूप में आ रही हैं संक्रांति कुमारी
इस वर्ष संक्रांति कुमारी अवस्था में बाघ पर सवार होकर आगमन कर रही हैं। उनके हाथों में गदा है और वे कुमकुम का लेपन किए हुए पुष्प धारण किए नजर आती हैं। पीले वस्त्रों में सजी संक्रांति चांदी के पात्र में दूध का सेवन करते हुए फलों का भक्षण कर रही हैं। यह स्वरूप शक्ति, परिवर्तन और उथल-पुथल का संकेत माना जाता है।
किस दिशा में होगा संक्रांति का प्रवास
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार संक्रांति इस बार वायव्य दिशा की ओर देखते हुए पश्चिम दिशा की ओर गमन कर रही हैं। दिशा परिवर्तन का प्रभाव मौसम, जनजीवन और प्राकृतिक गतिविधियों पर पड़ता है। पश्चिम और उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में विशेष सावधानी की आवश्यकता बताई जा रही है।
जनता, पशु और बाजार पर क्या होगा असर
इस वर्ष की संक्रांति जनता के स्वास्थ्य में बाधा के संकेत दे रही है। वहीं चांदी और सोने के भाव में तेजी के योग बन रहे हैं। खाद्यान्नों, शक्कर और कपास के दाम बढ़ सकते हैं। पशुओं को कष्ट और छोटे बच्चों को शारीरिक पीड़ा की आशंका जताई जा रही है। समुद्र तटीय राज्यों के लिए भी यह समय सतर्कता का है।
इन राशियों के लिए शुभ, इनको करना होगा दान
मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए यह संक्रांति विशेष रूप से फलदायक मानी गई है। वहीं मेष, वृष, कर्क, सिंह, तुला, वृश्चिक, धनु और मीन राशि के जातकों को कष्ट का सामना करना पड़ सकता है। इन राशियों के लोगों को तिल, गुड़, वस्त्र और अन्न का दान करने की सलाह दी गई है।
धार्मिक उपाय से कम होगा प्रभाव
मकर संक्रांति के दिन सूर्य को अर्घ्य देना, तिल-गुड़ का सेवन और जरूरतमंदों को दान करना नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकता है। यह पर्व संयम, सेवा और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है।