Mala Jap Rules: सनातन परंपरा में मंत्र जाप को साधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। नियमित रूप से मंत्रों का जाप करने से मन को एकाग्र करने और आध्यात्मिक शांति पाने में मदद मिलती है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं में माला से जाप करने के लिए कुछ विशेष नियम भी बताए गए हैं। माला के मनकों को किस तरह फेरना है, किस उंगली का इस्तेमाल करना है और किस दिशा में बैठना है, इन सभी बातों का भी महत्व माना जाता है। माला जप करते समय सबसे खास नियमों में से एक तर्जनी उंगली से जुड़ा है। मान्यता के अनुसार जप के दौरान तर्जनी को माला से दूर रखना चाहिए। आइए जानते हैं माला जप से जुड़े प्रमुख नियम और इनके पीछे बताई जाने वाली धार्मिक मान्यताएं।
जप में तर्जनी उंगली का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता?
माला फेरते समय तर्जनी यानी इंडेक्स फिंगर का प्रयोग नहीं करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में इस उंगली को अहंकार, अधिकार और निर्देश देने की प्रवृत्ति से जोड़ा जाता है। दूसरी ओर, मंत्र जाप को आत्मसंयम और मन की एकाग्रता से जुड़ी साधना माना जाता है। इसी वजह से जप के दौरान तर्जनी को अलग रखा जाता है। माला को आगे बढ़ाने के लिए मुख्य रूप से अंगूठे और मध्यमा उंगली का इस्तेमाल करने की परंपरा बताई गई है।
माला से जाप करते समय इन बातों का रखें ध्यान
माला फेरने का तरीका: माला को अनामिका उंगली पर टिकाकर अंगूठे और मध्यमा की सहायता से प्रत्येक मनके को आगे बढ़ाया जाता है। तर्जनी उंगली इस दौरान माला से अलग रखी जाती है।
माला जमीन पर न रखें: धार्मिक मान्यता के अनुसार जप के दौरान माला को फर्श या जमीन से स्पर्श नहीं कराना चाहिए। इसे साफ और सम्मानजनक तरीके से रखना चाहिए।
सुमेरु को पार न करें: अधिकांश जप मालाओं में 108 मनकों के अलावा एक अलग और बड़ा मनका होता है, जिसे सुमेरु कहा जाता है। जाप करते समय सुमेरु को पार करने की बजाय वहां पहुंचने के बाद माला को दूसरी दिशा में घुमाकर जप जारी रखने की परंपरा है।
गोमुखी का इस्तेमाल: कई साधक जप करते समय माला को गोमुखी नाम की कपड़े की थैली में रखते हैं। इससे माला ढकी रहती है और साधना के दौरान ध्यान भी केंद्रित रखने में सहायता मिलती है। हालांकि, हर परंपरा में इसका इस्तेमाल अनिवार्य नहीं माना जाता।
स्वच्छता का रखें ध्यान: जाप शुरू करने से पहले स्नान या हाथ-पैर धोकर साफ-सुथरे होकर बैठने की परंपरा है। इसके लिए स्वच्छ आसन का इस्तेमाल किया जाता है। जप के दौरान माला को नाभि से ऊपर और हृदय के आसपास रखने की बात भी कुछ परंपराओं में कही गई है।
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किस दिशा में बैठकर करना चाहिए माला जाप?
मंत्र जाप के लिए सुबह का शांत समय विशेष माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त में वातावरण अपेक्षाकृत शांत रहने के कारण इस समय साधना करने की परंपरा कई धार्मिक परंपराओं में मिलती है। दिशा की बात करें तो सामान्य रूप से पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके जप करने की मान्यता है। हालांकि, अलग-अलग मंत्र, साधना पद्धति और संप्रदाय के अनुसार नियमों में अंतर हो सकता है। इसलिए किसी विशेष साधना के लिए अपने गुरु या पारंपरिक विधि में बताए गए निर्देशों को प्राथमिकता देना उचित माना जाता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।