Malaysia Export Growth Record : दुनिया के व्यापार में अब मलेशिया भी तेजी से अपनी ताकत दिखा रहा है। सितंबर में देश का निर्यात 54.5 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 52.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया। अप्रैल 2021 के बाद यह सालाना आधार पर सबसे बड़ी बढ़त है। खास बात यह है कि लगातार छठे महीने मलेशिया के निर्यात में 35 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। 1970 के दशक के बाद यह इस तरह का सबसे लंबा सिलसिला बताया जा रहा है। इस बढ़त ने मलेशिया को वैश्विक व्यापार में चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग का फायदा
मलेशिया के निर्यात में इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी है। सितंबर में इन उत्पादों का निर्यात 69.2 फीसदी बढ़ गया। इसके पीछे कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़े सामान की दुनिया भर में बढ़ती मांग को अहम वजह माना जा रहा है। वहीं, तैयार औद्योगिक सामान के निर्यात में 58.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इससे कुल निर्यात में इन उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़कर 89.1 फीसदी तक पहुंच गई। इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन मलेशिया की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दे रहा है।
ताइवान को निर्यात में 175% की छलांग
मलेशिया के निर्यात में सबसे ज्यादा चर्चा ताइवान को लेकर है। सितंबर में ताइवान को होने वाला निर्यात 175 फीसदी बढ़ गया। ताइवान मलेशिया से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और ऊर्जा से जुड़े उत्पाद खरीदता है। इसी अवधि में अमेरिका को निर्यात 89.9 फीसदी, सिंगापुर को 50.4 फीसदी, यूरोपीय संघ को 35.3 फीसदी और चीन को 22.1 फीसदी बढ़ा। इन आंकड़ों से पता चलता है कि मलेशिया के उत्पादों की मांग कई बड़े बाजारों में बढ़ रही है। खासकर तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े कारोबार में उसे फायदा मिलता दिखाई दे रहा है।
सेमीकंडक्टर से मशीनरी तक बड़ा कारोबार
मलेशिया के निर्यात में इंटीग्रेटेड सर्किट, सेमीकंडक्टर, कंप्यूटर उपकरण, खनिज ईंधन, तेल, मशीनरी और चिकित्सा उपकरण जैसे उत्पाद शामिल हैं। देश की अर्थव्यवस्था का आकार करीब 547 अरब डॉलर बताया गया है, जबकि प्रति व्यक्ति जीडीपी लगभग 16 हजार डॉलर है। चीन के मुकाबले मलेशिया की अर्थव्यवस्था छोटी जरूर है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी सामान के कारोबार में उसकी अहम भूमिका है। एआई से जुड़े उत्पादों की मांग बढ़ने के साथ इन क्षेत्रों में मलेशिया के लिए आगे बढ़ने के नए अवसर बन रहे हैं।
ये भी पढ़ें : Mumbai Airport पर बड़ा बदलाव! IndiGo और Air India की उड़ानें होंगी शिफ्ट, दिसंबर से शुरू होगी प्रक्रिया
चीन से कारोबार हटने का फायदा
कोरोना महामारी के बाद कई वैश्विक कंपनियां चीन पर अपनी निर्भरता कम करने और दूसरे देशों में भी उत्पादन बढ़ाने की रणनीति अपना रही हैं। इसे ‘चाइना प्लस वन’ नीति कहा जाता है। मलेशिया समेत कई एशियाई देशों को इसका फायदा मिल रहा है। कंपनियां अपने कारोबार और आपूर्ति व्यवस्था के लिए नए विकल्प तलाश रही हैं। मलेशिया का मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग और वैश्विक बाजारों से जुड़ाव उसे इस बदलाव का लाभ उठाने में मदद कर सकता है। हालांकि, निर्यात में तेजी के साथ यह देखना भी जरूरी होगा कि आने वाले महीनों में यह बढ़त कितनी टिकाऊ रहती है।
चीन को चुनौती, लेकिन मुकाबला आसान नहीं
चीन की अर्थव्यवस्था और निर्यात का आकार मलेशिया से कहीं बड़ा है। पिछले साल चीन का निर्यात करीब 3.77 ट्रिलियन डॉलर रहा था, जबकि मलेशिया का निर्यात लगभग 375 अरब डॉलर था। चीन का व्यापार अधिशेष भी एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा। ऐसे में मलेशिया की मौजूदा तेजी को चीन के लिए तत्काल बड़ा खतरा कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और एआई से जुड़े सामान की बढ़ती मांग मलेशिया को वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था में मजबूत जगह दिला सकती है। आने वाले समय में निर्यात की रफ्तार और नई कंपनियों का निवेश तय करेगा कि मलेशिया इस मौके का कितना फायदा उठा पाता है।