
मालेगांव ब्लास्ट केस में NIA की विशेष अदालत ने सूबतों की पुष्टि न होने पर सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. अदालत ने साफ किया कि अभियोजन पक्ष धमाके की घटना को साबित नहीं कर पाया है. इससे ये साबित नहीं होता है कि मोटरसाइकिल में बम प्लांट किया गया. अदालत के निर्णय के बाद भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा, "हिंदू कभी आतंकी नहीं हो सकता. कांग्रेस ने सिर्फ वोटबैंक की राजनीति को लेकर भगवा आतंकवाद का झूठा नैरेटिव गढ़ा है. निर्दोषों पर फर्जी केस थोपे."
उन्होंने लिखा, "साफ है कांग्रेस कांग्रेस ने एक साजिश रची थी। सोनिया गांधी, पी. चिदंबरम और सुशीलकुमार शिंदे जैसे नेताओं को हिंदूओं से माफी मांगी चाहिए. उन्होंने सनातन को बदनाम करने की कोशिश की. सनातन धर्म पवित्र है. हिंदू आतंकवादी हो नहीं सकता. गर्व से कहो हम हिंदू हैं."
धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया: ओवैसी
वहीं ऑल इंडिया इत्तेहादुल मुस्लमीन के प्रमुख और हैदराबाद से सासंद असदुद्दीन ओवैसी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "मालेगांव विस्फोट मामले का निर्णय निराशाजनक है. धमाके में छह नमाजी मारे गए. लगभग 100 घायल हुए. उन्हें उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया."
ओवैसी ने आगे लिखा, "विस्फोट के 17 साल बाद, अदालत ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. क्या मोदी और फडणवीस सरकारें इस निर्णय के खिलाफ अपील करेंगी, जिस तरह उन्होंने मुंबई ट्रेन विस्फोटों में आरोपियों को बरी करने पर रोक लगाने की अपील की थी? क्या महाराष्ट्र के "धर्मनिरपेक्ष" राजनीतिक दल जवाबदेही की मांग करेंगे? उन छह लोगों की किसने हत्या किसने की?"
अदालत ने क्या कहा
अदालत ने कहा कि धमाके के बाद पंचनामा ठीक से नहीं कराया गया. इसके साथ घटनास्थल से फिंगरप्रिंट नहीं मिले हैं. बाइक का चेसिस नंबर कभी भी रिकवर नहीं हो सका है. इसके साथ ही वह बाइक साध्वी प्रज्ञा के नाम से थी. इसकी पुष्टि नहीं हो पाई. कोर्ट ने साफ किया कि सातों आरोपी निर्दोष हैं. केवल संदेह के आधार पर किसी को सजा नहीं दी जा सकती है.