दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण होटल अग्निकांड ने कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। इस हादसे की सबसे मार्मिक कहानी एक ऐसे परिवार की है, जो अपने बीमार पिता का हालचाल लेने दिल्ली आया था, लेकिन आग और धुएं के बीच पूरा परिवार काल का शिकार बन गया। हादसे से पहले किया गया एक फोन कॉल अब परिवार की आखिरी याद बनकर रह गया है।
आग के बीच किया गया आखिरी फोन
हादसे के दौरान चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल ने अपने रिश्तेदार को फोन कर मदद की गुहार लगाई थी। फोन पर उनकी आवाज में घबराहट साफ महसूस हो रही थी। उन्होंने बताया कि होटल के अंदर धुआं तेजी से फैल रहा है और बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल रहा। रिश्तेदार ने उन्हें धुएं से बचने के उपाय बताए, लेकिन हालात इतने गंभीर थे कि कुछ ही देर बाद संपर्क टूट गया।
पिता से मिलने आया था पूरा परिवार
परिवार के सदस्य एक बीमार बुजुर्ग की देखभाल और हालचाल जानने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। अस्पताल के पास ठहरने के लिए होटल में कमरे बुक किए गए थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह यात्रा उनके जीवन की आखिरी यात्रा साबित होगी। परिवार के कई सदस्य एक साथ होटल में ठहरे हुए थे और आग लगने के बाद सभी उसकी चपेट में आ गए।
एक रात में उजड़ गया पूरा घर
इस दर्दनाक हादसे में परिवार के कई सदस्यों की जान चली गई। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक कोई भी आग और धुएं के कहर से बच नहीं सका। जो लोग अपने परिजन की सेहत की चिंता में दिल्ली पहुंचे थे, वे खुद एक बड़ी त्रासदी का शिकार बन गए। हादसे के बाद परिवार से जुड़ा लगभग पूरा घर उजड़ गया।
होटल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
घटना के बाद होटल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि भवन में आपातकालीन निकास और बचाव व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी। आग लगने के बाद धुआं तेजी से पूरे परिसर में फैल गया, जिससे लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाया। जांच एजेंसियां अब हादसे के कारणों और सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल कर रही हैं।
शहर में शोक, जांच जारी
अग्निकांड के बाद मृतकों के परिजनों और परिचितों में गहरा शोक है। स्थानीय लोग परिवार को मिलनसार और समाज से जुड़ा हुआ बताते हैं। हादसे में कुल 21 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।