पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षी दुर्गा आंगन परियोजना को लेकर जबरदस्त सियासी बहस छिड़ी हुई है। जहां एक ओर विपक्ष इस योजना को लेकर सरकार पर सवाल खड़े कर रहा है, वहीं ममता बनर्जी खुद सामने आकर अपने सेक्युलर रवैये का बचाव करती दिखीं। इफ्तार पार्टी में शामिल होने से लेकर दुर्गा आंगन की आधारशिला तक, पूरा मामला राजनीतिक और धार्मिक विमर्श का केंद्र बन गया है।
दुर्गा आंगन परियोजना पर क्यों मचा सियासी घमासान
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रस्तावित दुर्गा आंगन परियोजना को लेकर विपक्षी दल लगातार हमलावर हैं। बीजेपी का आरोप है कि यह परियोजना नियमों को ताक पर रखकर शुरू की जा रही है और इसके लिए न तो पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई और न ही कोई वैध वर्क ऑर्डर जारी हुआ। विपक्ष का कहना है कि जिस जमीन पर यह परियोजना बनाई जा रही है, वह पहले औद्योगिक उपयोग के लिए चिन्हित थी।
‘मैं सच्ची सेक्युलर हूं’—ममता बनर्जी का पलटवार
आरोपों से आहत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंच से भावुक होकर कहा कि वह हर धर्म का सम्मान करती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वह गुरुद्वारे में सिर ढकती हैं या इफ्तार में शामिल होती हैं, तो इसमें आपत्ति क्यों होती है। ममता ने कहा कि हर धर्म के अपने नियम होते हैं और उनका पालन करना ही भारत की साझा संस्कृति की पहचान है।
इफ्तार पार्टी पर उठे सवालों का जवाब
ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि इफ्तार या किसी भी धार्मिक आयोजन में शामिल होना तुष्टिकरण नहीं, बल्कि सेक्युलर मूल्यों की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि उन पर बार-बार आरोप लगाए जाते हैं, जबकि वह सभी धर्मों के कार्यक्रमों में समान रूप से जाती हैं और यही उनकी राजनीति का आधार है।
‘असुर का नाश हो, इंसानियत लौटे’—भावुक अपील
कार्यक्रम के दौरान ममता बनर्जी ने मां दुर्गा से प्रार्थना करते हुए कहा कि समाज में नफरत और हिंसा फैलाने वाली ताकतों का अंत हो। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के समय में कई जानें गई हैं, जो बेहद दुखद है, और अब इंसानियत को बचाने की जरूरत है।
विपक्ष के आरोप और राजनीतिक तकरार
नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने दुर्गा आंगन परियोजना को पूरी तरह फर्जी करार दिया। वहीं बीजेपी नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की बात कही। दूसरी ओर, ममता सरकार इस परियोजना को सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देख रही है और इसे श्रद्धालुओं के लिए एक बड़े केंद्र के रूप में पेश कर रही है।
दुर्गा आंगन की खासियतें
सरकार के मुताबिक, कोलकाता में प्रस्तावित दुर्गा आंगन परिसर करीब दो लाख वर्ग फीट में फैला होगा, जहां साल भर मां दुर्गा के दर्शन किए जा सकेंगे। यहां रोजाना एक लाख श्रद्धालुओं के आने की क्षमता बताई जा रही है।