पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को पश्चिम मिदनापुर जिले के सालबोनी पुलिस थाना क्षेत्र में कलकत्ता हाई कोर्ट के अधिवक्ता शमीम अहमद पर हुए हमले की कड़ी निंदा की।बनर्जी ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और प्रशासन से अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया। बनर्जी ने कहा कि सालबोनी पुलिस थाना क्षेत्र के पास पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के नव निर्वाचित सदस्य अधिवक्ता शमीम अहमद पर हुआ क्रूर हमला बेहद चिंताजनक है! मुझे यह जानकर गहरा सदमा लगा है कि उन पर अपनी शिकायत बदलने का दबाव भी डाला गया। कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के हस्तक्षेप के बाद शमीम सुरक्षित घर लौट आए।
महिलाओं के साथ छेड़छाड़ भी
पूर्व मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी तब आई जब अहमद और कलकत्ता हाई कोर्ट एवं मिदनापुर न्यायालय के अधिवक्ताओं सहित वकीलों के एक समूह को सालबोनी पुलिस थाना क्षेत्र पहुंचने से पहले धाडिका बाजार क्षेत्र में कथित तौर पर तीन बार निशाना बनाया गया। वकीलों ने आरोप लगाया कि हमलों में लाठी, फावड़े और बांस का इस्तेमाल किया गया। कलकत्ता हाई कोर्ट के तीन पुरुष वकील और दो महिला वकील घायल हो गए। आरोप है कि महिलाओं के साथ छेड़छाड़ भी की गई।
वाहनों में तोड़फोड़ की
घटना के बाद, पश्चिम मिदनापुर पुलिस ने वकीलों को उनकी सुरक्षा के लिए इलाके से बाहर निकाला, लेकिन कथित तौर पर सालबोनी पुलिस स्टेशन के पास उन पर फिर से हमला किया गया। तीन वाहनों में तोड़फोड़ की गई।इस घटना पर बोलते हुए ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि बैंकशाल कोर्ट और बारुईपुर कोर्ट में वकीलों पर हुए हालिया हमले भी उतने ही अस्वीकार्य हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जंगल राज नहीं चल सकता।
पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में धमकी और जंगल राज की संस्कृति को पनपने नहीं दिया जा सकता। कानून का शासन राजनीतिक हिंसा पर हावी होना चाहिए। प्रत्येक वकील, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा का हो, बिना किसी डर के अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करने में सक्षम होना चाहिए। ममता बनर्जी ने कहा, "मैं भाजपा के गुंडों द्वारा किए गए इस तरह के बार-बार होने वाले अत्याचारों की कड़ी निंदा करती हूं और प्रशासन से वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई करने का आग्रह करती हूं।"