Mamata Banerjees Government: भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से जारी पश्चिम बंगाल के उद्योग समर्थक मुख्यमंत्रियों की सूची में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम शामिल नहीं किए जाने पर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। चैंबर ने अपने बयान में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने उद्योग और व्यापार से जुड़े कार्यक्रमों को समर्थन दिया था, लेकिन ममता बनर्जी का नाम सूची में नहीं रखा गया। इस घटनाक्रम के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
पूर्व मुख्यमंत्रियों का किया गया उल्लेख
चैंबर ऑफ कॉमर्स ने अपने संदेश में पश्चिम बंगाल के कई पूर्व मुख्यमंत्रियों जैसे डॉ. बिधान चंद्र रॉय, पीसी सेन, अजय मुखर्जी, सिद्धार्थ शंकर रॉय, ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्जी का उल्लेख किया। संस्था का कहना है कि इन नेताओं ने उद्योग और व्यापार से जुड़े आयोजनों को प्रोत्साहन दिया था। हालांकि, हाल के वर्षों की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाली ममता बनर्जी का नाम सूची से बाहर रहने पर सवाल उठने लगे हैं।
प्रशासन के रवैये पर उठाए सवाल
भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स ने आरोप लगाया कि महामारी और चक्रवात जैसी आपदाओं के दौरान सहयोग देने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। संस्था ने दावा किया कि उद्योग और निवेश से जुड़े मुद्दों पर सरकार का रवैया सकारात्मक नहीं रहा। इस बयान के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
बीजेपी ने साधा निशाना
बीजेपी सांसद शमिक भट्टाचार्य ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बंगाल में उद्योग लगाने के इच्छुक कारोबारियों को पहले जमीन और प्रशासनिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने दावा किया कि नई भूमि नीति पर काम चल रहा है और आने वाले समय में कारोबारियों को बेहतर माहौल मिलेगा। साथ ही उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि भविष्य में व्यापार करने में किसी तरह की बाधा नहीं आने दी जाएगी।
निवेश और उद्योग को लेकर बढ़ी चर्चा
चैंबर के बयान और बीजेपी के दावों के बाद पश्चिम बंगाल में उद्योग, निवेश और कारोबार के माहौल को लेकर बहस तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और ज्यादा चर्चा का केंद्र बन सकता है। वहीं उद्योग जगत की नजर अब सरकार की नीतियों और संभावित बदलावों पर टिकी हुई है।