पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस लगातार झटकों का सामना कर रही है। पहले विधायकों के बीच असंतोष सामने आया और अब सांसदों में भी खुली नाराजगी दिखाई देने लगी है। पार्टी के अंदर चल रही खींचतान ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच खबर है कि कई सांसदों ने अलग रुख अपनाते हुए संसद में नई व्यवस्था की मांग की है।
सयानी घोष का नाम आते ही बढ़ी हलचल
टीएमसी की युवा और तेजतर्रार नेता सयानी घोष का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल और तेज हो गई है। जादवपुर से सांसद सयानी घोष लंबे समय से ममता बनर्जी की करीबी नेताओं में गिनी जाती रही हैं। पार्टी की बड़ी प्रचारक और युवा चेहरे के तौर पर उनकी पहचान रही है। ऐसे में उनका नाम बागी सांसदों के साथ जुड़ना टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
20 सांसदों के अलग रुख की चर्चा
जानकारी के मुताबिक, करीब 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र देकर अलग बैठने की मांग की है। इस समूह ने संसदीय नेतृत्व में बदलाव की भी बात उठाई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर यह असंतोष आगे बढ़ा तो पार्टी के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
अभिनय से राजनीति तक का सफर
राजनीति में आने से पहले सयानी घोष बंगाली फिल्म और मनोरंजन जगत का जाना-पहचाना चेहरा थीं। 2021 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा और तेजी से पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गईं। उन्हें युवा वर्ग और महिला मतदाताओं के बीच लोकप्रिय माना जाता रहा है। बाद में उन्हें पार्टी की युवा इकाई की बड़ी जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
विवादों से भी रहा नाता
सयानी घोष कई बार अपने बयानों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर सुर्खियों में रही हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उनके गीत और बयान चर्चा का विषय बने थे। त्रिपुरा में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान भी उनका नाम विवादों में आया था। हालांकि इन घटनाओं के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने हमेशा उन पर भरोसा जताया।
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ममता के सामने सबसे बड़ी चुनौती
टीएमसी के भीतर बढ़ती नाराजगी अब केवल संगठनात्मक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह पार्टी की एकता की परीक्षा बनती जा रही है। विधायकों के बाद सांसदों के बीच असंतोष ने ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटता है और क्या आने वाले दिनों में बागी खेमे का दायरा और बढ़ता है।