TMC Symbol Freeze : पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह ‘जोड़ा फूल और घास’ को चुनाव आयोग द्वारा फ्रीज किए जाने के बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
कपिल सिब्बल ने उठाया मामला
सोमवार को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने ममता बनर्जी गुट की ओर से सुप्रीम कोर्ट में मामले का उल्लेख किया। उन्होंने कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने उपचुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद अचानक पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को फ्रीज कर दिया। सिब्बल का कहना था कि आयोग कई महीनों तक कोई फैसला नहीं ले रहा था, लेकिन चुनाव प्रक्रिया शुरू होते ही आदेश जारी कर दिया गया।
CJI ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कपिल सिब्बल की दलीलें सुनीं। हालांकि उन्होंने मामले के गुण-दोष पर तत्काल चर्चा से इनकार किया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जब मामला औपचारिक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होगा, तब सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा। साथ ही उन्होंने जल्द सुनवाई के लिए मामला लगाने का आश्वासन भी दिया।
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दो गुटों के बीच असली विवाद क्या है?
तृणमूल कांग्रेस के भीतर संगठन और नेतृत्व को लेकर दो गुट आमने-सामने हैं। एक तरफ ममता बनर्जी का गुट है, जबकि दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट दावा कर रहा है कि पार्टी का पुराना संगठनात्मक ढांचा अपना कार्यकाल पूरा कर चुका है और अब वह वैध नहीं है। ममता गुट इस दावे को पूरी तरह खारिज कर रहा है। इसी विवाद के चलते मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा।
चुनाव आयोग ने दिया अंतरिम फैसला
6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी किया। आयोग ने दोनों गुटों को फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘जोड़ा फूल और घास’ चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने से रोक दिया। साथ ही दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए गए हैं।
किसे मिला कौन सा नाम और चिन्ह?
चुनाव आयोग के फैसले के तहत ममता बनर्जी गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह दिया गया है। वहीं ऋतब्रत बनर्जी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम के साथ ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। फिलहाल यह व्यवस्था केवल उपचुनावों के लिए अंतरिम तौर पर लागू की गई है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय हो सकता है कि बंगाल की सियासत में असली तृणमूल कांग्रेस कौन होगी।