मंदाकिनी की बाढ़ में फंसे एक व्यक्ति ने चार घंटे पेड़ पर बैठकर अपनी जान बचाई, जबकि जवानों ने बच्चों को गोद में उठाकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। नदी का जलस्तर 135.20 मीटर पहुंच गया, जो 2003 के 134.50 मीटर के रिकॉर्ड से 70 सेंटीमीटर अधिक है। रामघाट समेत कई निचले इलाके जलमग्न हो गए। सड़कों पर पानी भरने के साथ हनुमानधारा मार्ग का पुल भी बह गया।
टीमें लगातार अभियान चला रही
बाढ़ के तेज बहाव में कई परिवार घरों और छतों पर फंस गए। बचाव दलों ने नावों की मदद से लोगों को निकाला। छतों पर फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए हेलीकॉप्टर की भी मदद ली गई। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की टीमें लगातार अभियान चला रही हैं।
प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी
रामघाट और आसपास के धार्मिक स्थलों में पानी भरने से नुकसान हुआ है। गोस्वामी तुलसीदास की प्रतिमा भी बाढ़ की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गई। चित्रकूट-सतना और मानिकपुर-सतना मार्ग प्रभावित होने से आवागमन पर असर पड़ा है। प्रशासन ने तटवर्ती और प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है।