वैदिक ज्योतिष के अनुसार 23 फरवरी 2026 से ग्रहों की स्थिति में महत्वपूर्ण परिवर्तन होने जा रहा है। इस अवधि में मंगल और राहु एक ही राशि में संयोग बनाएंगे, जिसे ज्योतिष शास्त्र में चुनौतीपूर्ण माना जाता है। मंगल ऊर्जा, साहस और क्रोध का कारक है, जबकि राहु भ्रम, अचानक घटनाओं और अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का प्रतिनिधित्व करता है। इन दोनों की युति 2 अप्रैल तक कुछ राशियों के लिए विशेष सावधानी की मांग कर सकती है।
मंगल-राहु युति का ज्योतिषीय प्रभाव
जब मंगल और राहु एक साथ आते हैं, तो इसे अंगारक योग भी कहा जाता है। यह योग व्यक्ति के स्वभाव में आवेश, जल्दबाजी और निर्णयों में अस्थिरता ला सकता है। इस दौरान वाहन चलाते समय, आर्थिक निवेश करते समय और विवादित परिस्थितियों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कार्यक्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है और छोटे मुद्दे भी बड़े विवाद का रूप ले सकते हैं। इसलिए संयम और धैर्य सबसे बड़ा उपाय माना जाता है।
मिथुन राशि पर संभावित असर
मिथुन राशि वालों के लिए यह समय मानसिक तनाव और कार्यभार बढ़ाने वाला हो सकता है। संवाद में गलतफहमी से रिश्तों में खटास आ सकती है। कार्यस्थल पर किसी सहकर्मी के साथ मतभेद होने की संभावना है। आर्थिक मामलों में जोखिम लेने से बचना बेहतर रहेगा। स्वास्थ्य के प्रति भी लापरवाही न बरतें, विशेषकर सिरदर्द या रक्तचाप संबंधी समस्या हो सकती है।
अन्य प्रभावित राशियां
मिथुन के अलावा कन्या, धनु और मीन राशि के जातकों को भी इस अवधि में सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। पारिवारिक जीवन में तनाव, अचानक खर्च या यात्रा में बाधा जैसी स्थितियां बन सकती हैं। हालांकि यह समय पूरी तरह नकारात्मक नहीं है—यदि ऊर्जा को सही दिशा में लगाया जाए तो अधूरे कार्य पूरे किए जा सकते हैं। क्रोध पर नियंत्रण और सोच-समझकर निर्णय लेना अत्यंत आवश्यक रहेगा।
क्या करें और क्या न करें
इस गोचर के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ, मंगलवार को व्रत और लाल वस्त्र या मसूर दाल का दान शुभ माना जाता है। किसी भी बड़े निवेश या नई साझेदारी से पहले विशेषज्ञ सलाह लेना लाभकारी रहेगा। ध्यान और योग से मानसिक संतुलन बनाए रखा जा सकता है। 2 अप्रैल के बाद ग्रह स्थिति में बदलाव से राहत मिल सकती है, इसलिए इस अवधि को धैर्य और समझदारी से पार करना ही सफलता की कुंजी होगी।