बिहार में सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली नई सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा उन नेताओं की हो रही है जिनका इस बार पत्ता कट गया। गुरुवार को हुए विस्तार में 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। बीजेपी कोटे से 15 और जेडीयू से 13 मंत्री बनाए गए। इसके अलावा सहयोगी दलों को भी जगह मिली। लेकिन इस पूरे विस्तार में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम मंगल पांडेय का रहा।
मंगल पांडेय बाहर
सीवान से विधायक और बीजेपी के बड़े नेताओं में गिने जाने वाले मंगल पांडेय को इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिल सकी। वह लंबे समय तक बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे थे। 2017 से लेकर 2022 तक उन्होंने स्वास्थ्य विभाग संभाला। बाद में उन्हें कृषि मंत्रालय की भी जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन सम्राट चौधरी सरकार में उनका नाम शामिल नहीं होने से राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
मैथिली का सवाल चर्चा में
बीजेपी विधायक और लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने इसी साल विधानसभा के बजट सत्र के दौरान अपने इलाके के अस्पतालों की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठाया था। उन्होंने सदन में कहा था कि अस्पताल की इमारत इतनी जर्जर है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने छत से गिरते प्लास्टर, टूटी दीवारों और बारिश में वार्डों में भरने वाले पानी का मुद्दा उठाकर सरकार से जवाब मांगा था।
जवाब से नहीं मानीं
तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने सदन में जवाब देते हुए कहा था कि सरकार अस्पतालों की स्थिति सुधारने को लेकर गंभीर है और कई नई इमारतों को मंजूरी दी जा चुकी है। लेकिन मैथिली ठाकुर इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुईं। उन्होंने सदन में ही दोबारा सवाल उठाते हुए कहा था कि उनके क्षेत्र में वर्षों से सिर्फ कागजी योजनाएं बन रही हैं लेकिन जमीन पर कोई बदलाव दिखाई नहीं दे रहा।
इसे भी पढ़ें : IPL 2026 में बल्लेबाजों की आंधी के बीच इन गेंदबाजों ने डॉट गेंदों से मचा दिया बड़ा तहलका
तीन मंत्रियों का पत्ता कटा
नई कैबिनेट में सिर्फ मंगल पांडेय ही नहीं बल्कि दो और पुराने मंत्रियों को भी जगह नहीं मिली। पूर्व आपदा प्रबंधन मंत्री नारायण प्रसाद और पूर्व पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री सुरेंद्र मेहता भी इस बार बाहर हो गए। जबकि बाकी ज्यादातर पुराने मंत्रियों को नई सरकार में फिर मौका मिल गया है। इससे बीजेपी और जेडीयू के भीतर भी कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सियासी संदेश क्या
राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि नई कैबिनेट में बदलाव सिर्फ चेहरे बदलने तक सीमित नहीं है बल्कि इसके जरिए बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश भी हुई है। बीजेपी अब जमीनी मुद्दों और क्षेत्रीय असंतोष को लेकर ज्यादा सतर्क दिखाई दे रही है। वहीं विपक्ष भी इस बदलाव को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि नई सरकार स्वास्थ्य और विकास जैसे मुद्दों पर कितना तेज काम करती है।