मंगला गौरी व्रत 2025: सावन माह के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व होता है। यह व्रत मुख्य रूप से सुहागन स्त्रियों और नवविवाहित महिलाओं द्वारा अपने दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि, पति की लंबी उम्र और पारिवारिक सुख की कामना के लिए रखा जाता है। 2025 में सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत 22 जुलाई, मंगलवार को मनाया जाएगा।
व्रत का धार्मिक महत्व
मंगला गौरी व्रत देवी पार्वती को समर्पित होता है। यह व्रत स्त्रियों के लिए विशेष फलदायी माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख है कि जो स्त्री इस व्रत को विधिपूर्वक करती है, उसके जीवन से सभी दुख और विघ्न दूर होते हैं। देवी पार्वती की कृपा से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सौहार्द बना रहता है। विशेष रूप से नवविवाहित महिलाएं यह व्रत सावन के प्रत्येक मंगलवार को पूरे मन और श्रद्धा से करती हैं।
शुभ मुहूर्त (22 जुलाई 2025)
पूजन का मुहूर्त: सुबह 06:00 बजे से लेकर दोपहर 12:00 बजे तक श्रेष्ठ समय रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त: 11:56 से 12:48 बजे तक।
अवसर: सावन माह का दूसरा मंगलवार – देवी पूजन के लिए अत्यंत शुभ दिन।
पूजन विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र पहनें।
देवी पार्वती की मूर्ति या चित्र को लकड़ी की चौकी पर स्थापित करें।
हल्दी, कुमकुम, अक्षत, रोली, लाल फूल, पान, सुपारी, मिठाई, नारियल और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
दीपक जलाकर "ॐ पार्वत्यै नमः" मंत्र का जाप करें।
मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें।
व्रत का पारण अगले दिन बुधवार को करें।
व्रत से मिलने वाले लाभ
पति की आयु और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।
वैवाहिक जीवन में प्रेम और स्थिरता आती है।
संतान प्राप्ति और गृहकल्याण में भी यह व्रत सहायक होता है।
मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव होता है।
यह भी जानें
सावन का मंगला गौरी व्रत स्त्रियों के लिए एक अत्यंत प्रभावशाली और मंगलदायक अवसर है। यदि श्रद्धा और विधि-विधान से इस दिन देवी गौरी का पूजन किया जाए, तो जीवन के हर क्षेत्र में शुभता और सफलता प्राप्त होती है।