Mangla Gauri Vrat 2026: सावन में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। सावन के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। खासतौर पर महिलाएं इस दिन पति की लंबी उम्र, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत करती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। इस बार सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत 18 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। इस दिन माता गौरी और भगवान शिव की साथ में पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ शिव-पार्वती की आराधना करने से दांपत्य जीवन में प्रेम और सुख-शांति की कामना की जाती है। आइए जानते हैं व्रत का शुभ समय और पूजा करने का सही तरीका।
मंगला गौरी व्रत पर शुभ मुहूर्त
*ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:25 बजे से 5:08 बजे तक
*प्रातः संध्या: सुबह 4:46 बजे से 5:52 बजे तक
*अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक
*विजय मुहूर्त: दोपहर 2:36 बजे से 3:28 बजे तक *
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:58 बजे से 7:20 बजे तक
*सायाह्न संध्या: शाम 6:58 बजे से रात 8:03 बजे तक *
अमृत काल:* रात 9:19 बजे से 11:02 बजे तक
*निशिता मुहूर्त: रात 12:03 बजे से 12:47 बजे तक, 19 अगस्त
*रवि योग: पूरे दिन
कैसे करें मंगला गौरी व्रत की पूजा?
व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा की तैयारी करें। इसके बाद माता पार्वती और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा के लिए घर के मंदिर या किसी साफ स्थान पर चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं। अब शिव-पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। दीपक और धूप जलाकर पूजा शुरू करें। माता गौरी को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। इसके बाद फल, मिठाई आदि का भोग लगाएं। भगवान शिव को उनकी प्रिय पूजा सामग्री चढ़ाकर श्रद्धा के साथ आराधना करें। अंत में शिव-पार्वती की आरती करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
शिव-पार्वती की साथ में पूजा क्यों मानी जाती है खास?
धार्मिक मान्यता में भगवान शिव और माता पार्वती को एक-दूसरे का पूरक माना गया है। शिव को चेतना और माता पार्वती को शक्ति का स्वरूप माना जाता है। इसलिए दोनों की संयुक्त आराधना को विशेष फलदायी बताया गया है। विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र, वैवाहिक सुख और दांपत्य जीवन में प्रेम की कामना से शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए माता गौरी से प्रार्थना करती हैं। मान्यता यह भी है कि शिव-पार्वती की पूजा से घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।