मार्च-अप्रैल की बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने इस बार आम की फसल पर गहरा असर डाला है। अनुकूल मौसम के बावजूद उत्पादन में करीब 30% तक गिरावट की आशंका जताई जा रही है। फूल आने और फल बनने के महत्वपूर्ण समय में मौसम बिगड़ने से न केवल पैदावार प्रभावित हुई है, बल्कि बाजार में सप्लाई कम होने से आम के दाम बढ़ने की संभावना भी तेज हो गई है।
फ्लावरिंग पर मौसम का सीधा असर
आम की फसल के लिए मार्च-अप्रैल का समय बेहद अहम माना जाता है, जब पेड़ों पर मंजरी (फूल) आती है और फल बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। लेकिन इस बार नमी और तापमान में अचानक बदलाव के कारण फूल झड़ने लगे हैं। इससे फल बनने की दर में गिरावट आई है, जो सीधे उत्पादन पर असर डाल रही है।
फंगल संक्रमण और परागण में कमी
बेमौसम बारिश और नमी ने एन्थ्रेक्नोज और पाउडरी मिल्ड्यू जैसे फंगल रोगों को बढ़ावा दिया है। तेज हवाओं से कच्चे फल गिर रहे हैं, वहीं कम धूप के कारण फलों में शुगर फॉर्मेशन भी प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा, परागण की प्रक्रिया कमजोर होने से फल बनने की संख्या में भी गिरावट देखी जा रही है।
अर्ली वैरायटी की सप्लाई पर असर
दक्षिण भारत से आने वाली अर्ली वैरायटी जैसे तोतापरी और राजापुरी की आवक इस बार सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती है। देशभर में मौसम सामान्य नहीं रहने के कारण शुरुआती खेप कम रहने की संभावना है। इसका सीधा असर बाजार में उपलब्धता और कीमतों पर पड़ेगा।
कीमतों में 10-25% तक उछाल संभव
सप्लाई में कमी के चलते आम की कीमतों में 10 से 25% तक बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है। खासकर शुरुआती सीजन में उपभोक्ताओं को आम खरीदने के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। बाद के महीनों में आवक बढ़ने पर कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है।
सीजन में देरी, किस्मों का बदलता क्रम
आम का सीजन आमतौर पर अप्रैल के अंत से जुलाई तक चलता है, लेकिन इस बार खराब मौसम के कारण कुछ क्षेत्रों में 10 दिन तक देरी संभव है। शुरुआत में दशहरी, तोतापरी और राजापुरी, इसके बाद लंगड़ा, चौसा और केसर, और अंत में आम्रपाली, मलिका और बंगनपल्ली बाजार में आते हैं। इस बार यह क्रम थोड़ा प्रभावित हो सकता है।