भारत की स्टार टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा ने एशियन गेम्स टीम से बाहर किए जाने के बाद खुलकर अपनी बात रखी है। मनिका ने कहा कि वह किसी से विशेष मौका या टीम में जगह नहीं मांग रही हैं। उनका कहना है कि उन्हें चयन से बाहर करने की वजह साफ तौर पर नहीं बताई गई। उन्होंने कहा कि उनके सवाल सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि हर उस खिलाड़ी के लिए हैं जो भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए मेहनत करता है।
रैंकिंग की टाइमलाइन पर सवाल
मनिका बत्रा ने कहा कि उनकी मौजूदा विश्व रैंकिंग 51 है और टेबल टेनिस रैंकिंग हर सप्ताह बदलती रहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि चयन के समय किस अवधि की रैंकिंग को आधार बनाया गया। क्या पिछले 12 महीने देखे गए या छह महीने या फिर केवल एक हफ्ते की रैंकिंग पर फैसला लिया गया। मनिका का कहना है कि अगर कोई खिलाड़ी लगातार शीर्ष 50 में रहा हो और एक-दो हफ्ते के लिए 51वें स्थान पर चला जाए तो उसे अचानक अयोग्य नहीं माना जा सकता।
मौजूदा फॉर्म को नजरअंदाज करने का आरोप
मनिका ने कहा कि इस सीजन में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है और उन्होंने कई मजबूत एशियाई खिलाड़ियों के साथ-साथ चीन की ऊंची रैंकिंग वाली खिलाड़ियों को भी हराया है। उन्होंने कहा कि चयन में मौजूदा फॉर्म और हालिया प्रदर्शन को भी अहमियत मिलनी चाहिए। मनिका ने खेल मंत्रालय के दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि एशियन गेम्स जैसी प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ियों के चयन में हालिया फॉर्म को भी देखा जाना चाहिए।
वोटिंग सिस्टम पर उठे सवाल
मनिका बत्रा ने दावा किया कि अंतिम चयन में वोटिंग प्रक्रिया शामिल होने की जानकारी उन्हें मिली है। उन्होंने पूछा कि अगर वोटिंग हुई तो किसने किस आधार पर फैसला लिया। क्या चयन के कारण लिखित रूप में दर्ज किए गए। क्या हितों के टकराव की जानकारी सार्वजनिक की गई। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया किसी निजी राय या पुराने मतभेदों से प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
अयहिका मुखर्जी का भी दिया उदाहरण
मनिका ने महिला डबल्स खिलाड़ी अयहिका मुखर्जी का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछली एशियन गेम्स में ऐतिहासिक पदक जीतने वाली टीम के खिलाड़ी भी बाहर रखे गए हैं। उनके मुताबिक जिन खिलाड़ियों ने भारत के लिए पदक और बड़े नतीजे दिए हैं उन्हें यह जानने का अधिकार है कि चयन के फैसले कैसे लिए गए। उन्होंने चयन समिति के सदस्यों के अनुभव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी योग्यता पर भी सवाल उठाए।
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जवाब नहीं मिला तो कानूनी कदम
मनिका ने कहा कि वह करीब 20 साल से भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और किसी एक फैसले पर भावुक होकर प्रतिक्रिया नहीं दे रहीं। उन्होंने कहा कि उनकी चिंता चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता निरंतरता और जवाबदेही को लेकर है। मनिका ने प्रधानमंत्री और खेल मंत्री से इस मामले को देखने की अपील की है। उन्होंने साफ कहा कि अगर उन्हें चयन से बाहर करने का संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वह अपनी कानूनी टीम के जरिए आगे की कार्रवाई कर सकती हैं।