लखनऊ। काशी के सबसे पवित्र महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्विकास कार्य को लेकर राजनीतिक बयार तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत पर हमला करार देते हुए केंद्र व राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बुलडोजर से तोड़फोड़ और क्षतिग्रस्त मूर्तियों के दृश्यों ने विवाद को और भड़का दिया है।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने लिखा, "बनारस में मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर चलाकर सदियों पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को ध्वस्त करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। मणिकर्णिका घाट और इसकी प्राचीनता का धार्मिक महत्व तो है ही, इससे लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की स्मृतियां भी जुड़ी हैं। विकास के नाम पर चंद लोगों के व्यावसायिक हितों के लिए देश की धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाना घोर पाप है। काशी की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान मिटाने की साजिशें बंद होनी चाहिए।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, अविनाशी काशी ही भाजपा के विनाश का कारण बनेगी। अखिलेश ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर सिर्फ पैसे कमाने के लिए काशी की अमूल्य धरोहर को नष्ट कर रही है। उन्होंने इसे भाजपा की चुनावी हिंदुत्व की सबसे कुरूप अभिव्यक्ति बताया। यह विवाद तब भड़का जब 25 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे घाट पुनर्विकास प्रोजेक्ट में कुछ प्राचीन मूर्तियां, खासकर महारानी अहिल्याबाई होल्कर से जुड़ी संरचनाएं क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई। स्थानीय लोगों और पाल समाज ने विरोध प्रदर्शन किया।
प्रशासन का कहना है कि कोई मंदिर नहीं तोड़ा गया, बल्कि पुरानी संरचनाओं को हटाकर नई व्यवस्था बनाई जा रही है। क्षतिग्रस्त कलाकृतियों को संरक्षित कर गुरूधाम मंदिर में रखा गया है और बाद में पुनः स्थापित किया जाएगा।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी कहा कि यह भोंडे सौंदर्यीकरण और व्यावसायीकरण की कोशिश है, जिससे भक्तों के साथ धोखा किया जा रहा है।
विपक्ष का दावा है कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बाद अब मणिकर्णिका घाट को भी कमर्शियल हब बनाने की साजिश रची जा रही है। इस मुद्दे पर दोनों ही पार्टियां एकजुट दिख रही हैं। फिलहाल काम जारी है।