लगभग एक साल बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन खत्म कर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने इससे जुड़ा नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। फरवरी 2025 से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू था, जब लगातार हिंसा और बिगड़ती कानून-व्यवस्था के हालात सामने आए थे। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद अब मणिपुर में दोबारा चुनी हुई सरकार का रास्ता साफ हो गया है। लंबे समय से राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद लगाए बैठे लोगों के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है।
नए मुख्यमंत्री के रूप में युमनाम खेमचंद सिंह
राष्ट्रपति शासन हटने के साथ ही युमनाम खेमचंद सिंह को मणिपुर का नया मुख्यमंत्री चुना गया है। उन्होंने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि उनके अनुभव और नेतृत्व से राज्य में शांति और विकास का नया दौर शुरू होगा। बीजेपी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मणिपुर अब सुशासन और स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ने को तैयार है।
आज शाम शपथ ग्रहण समारोह
युमनाम खेमचंद सिंह आज शाम 6 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह इम्फाल स्थित लोक भवन में होगा, जहां सुबह से ही तैयारियां चल रही हैं। बीजेपी की मणिपुर इकाई ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा की है। पार्टी के मुताबिक, सिंह के साथ कुछ अन्य विधायक भी मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं, जिससे नई सरकार का पूरा ढांचा सामने आएगा।
राज्यपाल से मुलाकात और सरकार बनाने का दावा
मुख्यमंत्री पद के लिए चुने जाने के बाद सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के प्रतिनिधिमंडल ने मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में कुकी-जो बहुल इलाकों चुराचांदपुर और फेरजॉल से जुड़े विधायक भी शामिल थे। इसे सामाजिक संतुलन और राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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बीजेपी और एनडीए की रणनीति
युमनाम खेमचंद सिंह को पहले भारतीय जनता पार्टी विधायक दल का नेता चुना गया और फिर एनडीए विधायक दल ने भी उनके नाम पर मुहर लगाई। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह फैसला सोच-समझकर लिया गया है ताकि सभी समुदायों का भरोसा जीता जा सके। बताया जा रहा है कि शुरुआती कैबिनेट में करीब पांच मंत्री शामिल हो सकते हैं।
शांति और स्थिरता से जुड़ी उम्मीदें
राष्ट्रपति शासन हटने के बाद मणिपुर के लोगों को अब सबसे ज्यादा उम्मीद शांति और सामान्य हालात की वापसी से है। पिछले एक साल में हिंसा ने आम लोगों की जिंदगी पर गहरा असर डाला था। नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और अलग-अलग समुदायों के बीच भरोसा बहाल करना होगी। अगर सरकार इसमें सफल होती है, तो मणिपुर एक बार फिर विकास की राह पर लौट सकता है।